पीडब्ल्यूडी में तबादलों को लेकर हुई गड़बड़ी के आरोप में हटाए गए विभागाध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता एवं प्रमुख अभियंता राकेश कुमार सक्सेना के पक्ष में उप्र इंजीनियर्स एसोसिएशन सामने आई है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा है कि संबंधित मंत्री एवं प्रमुख सचिव के अनुमोदन से ही तबादले होते हैं। ऐसे में निलंबित अधिकारियों को बहाल किया जाए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरजीत सिंह एवं महासचिव आशीष यादव ने बयान जारी कर कहा कि सीएम की पूर्णरूप से पारदर्शी प्रक्रिया की एसोसिएशन सराहना करता है पर हो सकता है कि इस प्रकरण के सारे तथ्य सीएम के संज्ञान में न लाए गए हों। उन्होंने कहा कि उप्र लोक निर्माण विभाग में अभियंता अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश लोक निर्माण विभाग मंत्री एवं प्रमुख सचिव एवं शासन की सहमति या अनुमोदन के बाद ही जारी किए जाते हैं। अधिशासी अभियंता से उच्च स्तर के अभियंताओं के स्थानांतरण आदेश शासन द्वारा जारी किए जाते हैं। इससे स्पष्ट है स्थानांतरण की प्रक्रिया केवल विभागाध्यक्ष द्वारा नहीं की जाती है।
लोक निर्माण विभाग में जून 2022 से अधिशासी अभियंता के 235 पद रिक्त चल रहे थे, जिससे प्रदेश में चल रहे विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष द्वारा शासन में प्रकरण की स्थिति को स्पष्ट करते हुए पिछले 5 वर्षों से लंबित चल रही पदोन्नति की प्रक्रिया पारदर्शी रूप से पूर्ण कराई गई।
एसोसिएशन के संज्ञान में आया है कि प्रकरण की जांच आख्या में भी निलंबित किए गए अभियंताओं का नाम नहीं है। आख्या के निष्कर्ष में केवल नाम अंकित किए गए हैं। ऐसी स्थिति में विभाग के उच्च अभियंता अधिकारियों का दोष निर्धारण किया जाना नियमों के विरुद्घ एवं अभियंताओं के प्रति अन्याय है।
एसोसिएशन ने सीएम से मांग की है कि विभाग के प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता, प्रमुख अभियंता राकेश कुमार सक्सेना एवं वरिष्ठ स्टाफ आफिसर, शैलेंद्र कुमार यादव के विरुद्ध की गई निलंबन की कार्रवाई समाप्त करते हुए उन्हें दोषमुक्त किया जाए। प्रकरण की पुन: निष्पक्ष जांच कराई जाए एवं जांच समिति में सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता को भी सम्मिलित किया जाए।