विश्वविद्यालय अब महाविद्यालयों को सीधे संबद्धता प्रदान कर सकेंगे। अभी तक शासन की अनुमति के बाद ही महाविद्यालयों को संबद्धता दिए जाने का प्रावधान था।
इसके लिए सरकार ने सोमवार को विधानसभा में उप्र राज्य विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2014 पेश किया जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
इसके अलावा वक्फ संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाने के लिए पिछले सप्ताह सदन में पेश किए गए उप्र सार्वजनिक भू-गृहादि (अप्राधिकृत अध्यासियों की बेदखली) (संशोधन) विधेयक, 2014 भी पास कर दिया गया।
महाविद्यालयों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर की संबद्धता देने के लिए विश्वविद्यालयों को राज्य सरकार से पूर्व अनुमति लेनी पड़ती थी। इसमें काफी वक्त लग जाता था।
विश्वविद्यालयों को और अधिक स्वायत्तता देने के लिए सरकार ने राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन करके विश्वविद्यालयों को सीधे संबद्धता प्रदान करने का अधिकार दे दिया है।
अगर किसी महाविद्यालय का आवेदन विश्वविद्यालय द्वारा नामंजूर कर दिया जाता है तो वह 30 दिन के भीतर राज्य सरकार के समक्ष अपील कर सकता है।
इसी तरह लखनऊ विश्वविद्यालय अभी तक अपने सहयुक्त (एसोसिएट) महाविद्यालयों को स्नातक की मान्यता स्वयं देता है जबकि स्नातकोत्तर की मान्यता के लिए राज्य सरकार से पूर्वानुमति लेनी पड़ती है।
सरकार ने राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन करके यह प्रावधान कर दिया है कि अब लखनऊ विवि अपने सहयुक्त महाविद्यालयों को अपने स्तर से ही स्नातकोत्तर की मान्यता प्रदान कर सकेगा।