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उपभोक्ताओं की जेब काट रहे कर्मचारी, रिश्वत नहीं दी तो 20 गुना दिया बिजली बिल

Thu, 05 Dec 2019 04:50 PM IST
ishwar ashish नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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केस-एक

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संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर ने मांगी रिश्वत
सेमरा गौढ़ी फैजुल्लागंज निवासी शहीबुल हसन का आरोप है कि उपखंड अधिकारी कार्यालय के संविदा कर्मचारी ने उनसे बिल सही करने को घूस मांगी। रकम न दी तो लगभग 7000 रुपये की जगह 1.41 लाख रुपये का बिल बना दिया। शहीबुल ने उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत की।

केस-दो
रकम जमा, फिर बना दिया 80,530 का बिल

फैजुल्लागंज उपकेंद्र इलाके के छत्रपाल सिंह ने मार्च की एकमुश्त समाधान योजना में बिल संशोधित कर 80,530 रुपये जमा कराए। हालांकि, उनका आरोप है कि उत्पीड़न करने को दोबारा 80,530 रुपये का बिल बनाकर उन्हें तलब किया गया। बिल ठीक करने को पैसे मांगे, पर उन्होंने दिए नहीं। मामले की जांच की जा रही है।
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लेसा के फैजुल्लागंज उपखंड में उपभोक्ताओं से रिश्वत मांगने की शिकायतों के ऐसे कई मामले हैं। खास बात यह है कि अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में इन्हें सही भी माना है। इसके बाद प्रबंध निदेशक संजय गोयल के आदेश पर 15 नवंबर को उपखंड के एसडीओ रत्नेश कुमार सिंह को लेसा ट्रांसगोमती जोन से हटाकर देवीपाटन जोन स्थानांतरित कर दिया गया। साथ ही आरोपों की उच्च स्तरीय जांच कराने की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता रमेश चंद्र शर्मा एवं लेखाधिकारी नीरज चतुर्वेदी को सौंपी गई है।

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एसडीओ के पासवर्ड का बेजा इस्तेमाल

प्रतीकात्मक तस्वीर
जानकारों का कहना है कि ये शिकायतें तो बानगी भर हैं। लेसा के अन्य उपखंडों में भी ऐसा ही खेल चल रहा है। जो उपभोक्ता समय पर बिजली बिल जमा कर रहे हैं, उगाही के लिए उन्हें फिर से संविदाकर्मी मोटी रकम का बिल थमा देते हैं।

इसके बाद जब उपभोक्ता कार्यालय पहुंचता है तो उपखंड अधिकारी के संविदा कंप्यूप्टर ऑपरेटर सौदेबाजी कर घूस देकर बिल कम करने की सलाह देते हैं। रिश्वत न देने पर वर्तमान रकम को मनमाने तरीके से बीस गुना तक बढ़ाकर बिल बना दिया जाता है। फैजुल्लागंज के बाद मध्यांचल निगम की अन्य उपखंडों की भी जांच कराने की तैयारी है।

फैजुल्लागंज प्रकरण में प्रबंध निदेशक को भेजी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में एसडीओ के पासवर्ड (आईडी) का बेजा इस्तेमाल करने का आरोप है। इसके जरिये ही लोगों के बिजली बिल में मनमाने तरीके से रकम जोड़ी जाती है। यानी एसडीओ के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर के पास उनकी आईडी थी।

उच्च अधिकारियों को बताएं समस्या

नई विद्युत पॉलिसी - फोटो : सोशल मीडिया
मध्यांचल निगम के उच्च अफसरों का मानना है कि संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर ने यदि आईडी का इस्तेमाल कर बिल मेें रकम जोड़ी तो अंदेशा है कि उसने गलत तरीके से रकम को घटाया भी होगा। ऐसे में अब एसडीओ को हटाने के साथ मामले की उच्च स्तरीय जांच हो रही है।

मुख्य अभियंता प्रदीप कक्कड़ की सलाह है कि बिल जमा करने के बाद भी जिन उपभोक्ताओं के पास अचानक मोटी रकम के बिल आते हैं तो संबंधित खंड के अधिशासी अभियंता से मुलाकात कर समस्या बताएं। इसका निराकरण न होने पर उच्च अफसरों को मामला बताएं। उपखंड के संविदाकर्मियों से मिलने की जरूरत नहीं है।
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देखें- इन पीड़ितों की शिकायत पर हो रही उच्च स्तरीय जांच

प्रतीकात्मक तस्वीर
इन पीड़ितों की शिकायत पर हो रही उच्च स्तरीय जांच
उपभोक्ता                         आरोप
विमला                     बिल में मनमाने तरीके से 6,180 रुपये जोड़ दिए।
मोहम्मद फारूम         बिल में 6,000 रुपये जोड़कर बुलाया गया।
सीएल दीक्षित             बिल में 6,000 रुपये की रकम को बढ़ा दिया।
चंद्रिका प्रसाद यादव     छह माह तक स्थायी विद्युत विच्छेदन के लिए दौड़ाया।
रविशंकर उपाध्याय      नौ माह दौड़ाकर तब किया स्थायी विद्युत विच्छेदन।
विजय लक्ष्मी              नो डिस्प्ले मीटर की शिकायत की, नहीं हुई कार्रवाई।
नमन अग्रवाल            बिजली बिल का समय से संशोधित नहीं किया।
एमआर यादव            बिल संशोधन के लिए कई महीने तक दौड़ाया।

मुख्य अभियंता की ओर से उपभोक्ताओं के उत्पीड़न की शिकायतों के सिलसिले में भेजी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की दो सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी पड़ताल कर रही है। वहीं, एसडीओ को लखनऊ से हटाकर देवीपाटन भेज दिया गया है। - संजय गोयल, प्रबंध निदेशक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, लखनऊ
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