आशीष बताते हैं कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग पूरी करके सोनीपत में जॉब के दौरान उन्होंने कुछ भीख मांगते बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया। लेकिन उन्हें अपनी यह कोशिश उस वक्त अधूरी लगी जब उन्होंने देश भर में भीख मांग रहे बच्चों की ओर देखा।
उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी और 22 अगस्त 2017 को पदयात्रा पर निकल पड़े। अशीष अब तक पहले चरण मे 4319 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर लोगों तक अपना संदेश पहुंचा चुके हैं। दुआएं फाउंडेशन के तहत 17 हजार किमी. की पदयात्रा को आशीष ने उनमुक्त भारत का नाम दिया है।
इस अभियान के तहत देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के गांवों में बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका कहना है कि मैं लोगों को यह बताना चाहता हूं कि भीख मांगते बच्चों को गाली न दें और शोषण करने के बजाय उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने में मदद करें।