राजधानी के बहुचर्चित आशियाना गैंगरेप केस में मुख्य गुनाहगार गौरव शुक्ला को 11 साल बाद 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
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फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार को सजा सुनाते हुए गौरव पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही, प्रदेश सरकार को पीड़िता को दो लाख रुपये हर्जाना देने का भी निर्देश दिया है।
वहीं, गौरव को 10 साल की सजा को नाकाफी बताते हुए पीड़िता ने दोषी को उम्रकैद दिलाने के लिए हाईकोर्ट जाने की बात कही है। पीड़िता के विशेष अधिवक्ता जलज गुप्ता ने बताया कि सजा के खिलाफ दोनों पक्ष 60 दिन के भीतर उच्च न्यायालय में अपील कर सकेंगे।
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2 मई 2005 के इस गैंगरेप कांड में छह अभियुक्त थे। इनमें से दो नाबालिग थे। वहीं, खुद को नाबालिग साबित करने के लिए गौरव ने कई दांवपेंच अपनाएं।
पांच दिन भी सजा के 10 साल में गिने जाएंगे
उसके तमाम दावों को खारिज करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 13 अप्रैल को दोषी ठहराया था। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। ये पांच दिन भी उसकी 10 साल की सजा में गिने जाएंगे।
सजा सुनाए जाने के बाद सरकारी वकीलों नरेंद्र सिंह यादव और सुनील कुमार यादव ने बताया कि गौरव पर लगाए गए कुल 20 हजार रुपये का दो तिहाई भाग पीड़िता को दिया जाएगा।
सोमवार सुबह साढ़े दस बजे गौरव शुक्ला को लखनऊ जेल से पुलिस अदालत लेकर आई है। यह माना जा रहा था कि दोपहर दो बजे निर्णय सुनाया जाएगा, लेकिन करीब साढ़े 11 बजे जज ने गौरव को कठघरे में बुलाया और सजा सुना दी।
कठिनाइयों के बावजूद 11 साल किया संघर्ष
अदालत ने निर्णय में कहा कि इस केस के समय 13 साल की रही पीड़िता से छह लोगों ने दुराचार किया था, यह साबित होता है। तमाम दुश्वारियों के बीच 11 साल तक उसने अपने मुकदमे की पैरवी की है। वह ऐसी स्थिति में है जहां उसे और उसके परिवार को आर्थिक सहायता की जरूरत है। ऐसे में प्रदेश सरकार को आदेश दिया गया कि वह राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के जरिए पीड़िता को बतौर हर्जाना दो लाख रुपये दिलवाए।
दो गुनाह में सुनाई सजा
आशियाना गैंगरेप
- फोटो : amar ujala
गैंगरेप में : आईपीसी की धारा 376 (2)(छ) के तहत 10 वर्ष कठोर कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न भरने पर तीन माह और जेल में काटने होंगे।
अपहरण में : आईपीसी की धारा 365 के तहत 5 साल कठोर कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न देने पर एक माह अतिरिक्त कारवास की सजा।
पीड़िता को सिगरेट-लाइटर से जलाने में दोषमुक्त
पीड़िता ने गौरव पर आरोप लगाया था कि अपहरण व दुराचार के दौरान अभियुक्त ने उसे सिगरेट व लाइटर से जलाया था। साथ ही जान से मारने की धमकी दी थी। अदालत ने गौरव को इन आरोपों से दोषमुक्त किया है।
फूटा पीड़िता का गुबार, पूछा मुख्य गुनाहगार को उम्रकैद क्यों नहीं?
सजा को नाकाफी बताते हुए पीड़िता ने कहा, ‘मैं कानूनी दांव-पेंच नहीं जानती, लेकिन सरकारी गवाह बनने के बावजूद जब गौरव के साथी फैजान को उम्र कैद हो सकती है, तो मुख्य गुनहगार को इतनी कम सजा क्यों? वह भी तब जब यह शुरू से ही खुद को नाबालिग साबित करने के लिए वह हर कदम पर कोर्ट को गुमराह करता रहा। बस खुशी इस बात की है कि हम गौरव को सीखचों के पीछे पहुंचाने में सफल रहे।’