लखनऊ। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक इस समय क्वार (आश्विन) का महीना चल रहा है। यह महीना साफ मौसम के लिए जाना जाता है। मानसून विदा ले रहा होता है। लेकिन बुधवार दोपहर नजारा कुछ अलग ही था। नीला आसमान काले बादलों से घिरा था। बादल गरज रहे थे, बिजलियां कड़क रही थीं, तेज बारिश से धरती तरबतर हो रही थी, जैसे आषाढ़ के महीने में होता है।
इस बारिश ने राजधानी के जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। शहर के अधिकांश इलाके जलमग्न हो गए। सड़कें तालाब बन गईं और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। हालत यह रही कि जलभराव से निजात दिलाने का दावा करने वाला नगर निगम मुख्यालय खुद पानी में डूब गया।
नगर निगम दफ्तर में जीना और लिफ्ट तक पानी भर गया। स्थिति यह रही कि नगर निगम के मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी महामिलिंद लाल, अपर नगर आयुक्त अरुण गुप्ता और मुख्य अभियंता महेश वर्मा तक मीटिंग में नहीं जा पाए। मुख्यालय के गेट तक जाने के लिए उन्हें दो फीट पानी से होकर गुजरना पड़ता, जिससे जूते और कपड़े भीगने का डर था। नतीजा यह हुआ कि अफसरों को दो घंटे तक दफ्तर में ही कैद रहना पड़ा।
नगर निगम में इसलिए होता है हर साल जलभराव
जानकार बताते हैं कि करीब दो साल पहले स्मार्ट सिटी योजना के तहत नगर निगम मुख्यालय के सामने की सड़क बनाई गई थी। उस दौरान नाली पाटकर फुटपाथ चौड़ा कर दिया गया और दिखावे के लिए पतली पाइप डाल दी गई। यह पाइप बारिश के पानी की निकासी में नाकाम साबित हुई। नतीजा यह हुआ कि पिछले साल की तरह इस बार भी मुख्यालय पानी में डूब गया। इंजीनियर विनोद पाठक, शनि विश्वकर्मा और धर्मेंद्र सिंह पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने जल निकासी की व्यवस्था को गंभीरता से नहीं लिया।
पूरे शहर का यही हाल
सिर्फ नगर निगम मुख्यालय ही नहीं, बल्कि शहर के बड़े हिस्से में बारिश का पानी भर गया। बुद्धा पार्क और कंवेनशन सेंटर के सामने, गोमती नगर विपुल खंड, नवल किशोर रोड, विक्रमाादित्य मार्ग, पार्क रोड, आशियाना, जानकीपुरम, इंदिरा नगर, फैजुल्लागंज, कुंडरी रकाबगंज, हजरतगंज, रामराम बैंक चौराहा, सेक्टर के अलीगंज, कपूरथला, महानगर मंदिर मार्ग, भूतनाथ बाजार, खजाना मार्केट, आशियाना पावर हाउस चौराहा, मोतीझील ऐशबाग, त्रिवेणी नगर, आलमबाग, गीतापल्ली, गोमती नगर जनेश्वर मिश्र पाक केपास, मवैया, केकेसी छत्ता पुल चारबाग, गोखले मार्ग, मौलवीगंज, नया हाईकोर्ट केसामने, इस्माइलगंज, पटेल नगर, इंदिरा नगर सेक्टर डी आदि समेत दर्जनों इलाकों में सड़कें डूब गईं। कहीं-कहीं तो जलभराव का स्तर कमर तक पहुंच गया।
जनता बेहाल
तेज बारिश के चलते लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया। कई वाहन पानी में बंद पड़ गए और ट्रैफिक जाम लग गया। लोगों ने कहा कि हर बार भारी बारिश के बाद यही हाल होता है, लेकिन नगर निगम और स्मार्ट सिटी के दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।
Iतेज बारिश थी इस कारण कुछ जगहों पर पानी भरा मगर वह बारिश बंद होते ही निकल गया। कुकरैल के पास पानी ज्यादा था वहां पर निकल गया। बारिश के दौरान बाढ़ पम्पिंग स्टेशनों का निरीक्षण भी किया गया ताकि कहींं कोई समस्या न आए।
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- गौरव कुमार, नगर आयुक्तI
शहर में बारिश और जलभराव।
शहर में बारिश और जलभराव।
शहर में बारिश और जलभराव।
शहर में बारिश और जलभराव।
शहर में बारिश और जलभराव।
शहर में बारिश और जलभराव।
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