नाबालिग किशोरी से दुराचार के आरोपी आसाराम के लखनऊ आश्रम की भूमि भी अब सरकार अपने अंडर में लेगी। सरोजनीनगर की यह भूमि लखनऊ मेट्रो रेल के मदर डिपो निर्माण के लिए अधिग्रहित की जाएगी।
आश्रम करीब 25 बीघा जमीन पर बना है, जिसमें से आधी भूमि को लेकर जिला प्रशासन और आश्रम संचालक के बीच कोर्ट में मामला लंबित है, जबकि बाकी भूमि निजी संपत्ति के तौर पर दर्ज है।
इस जमीन को मेट्रो के लिए मुआवजा देकर अधिग्रहित किया जाएगा। आश्रम संचालन का जिम्मा योग वेदांत समिति के पास है। 32 वीं वाहिनी पीएसी की भूमि से सटी हुई है यह जमीन। पीएसी की भूमि पर ही मेट्रो का मदर डिपो बनाना है।
इसके आगे सड़क और जरूरतों के लिए आश्रम की भूमि की आवश्यकता पड़ेगी। इस पूरे क्षेत्र के टोपोग्रॉफिकल सर्वे (भूमि पर निर्माण और अन्य स्थानों का सेटेलाइट के माध्यम से सर्वे) का टेंडर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने पूरा कर दिया है।
इसके जरिए यहां की पूरी जानकारी मिल सकेगी। जल्द ही अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
क्या है विवाद
इस आश्रम की आधी भूमि विवादित है। यह जमीन पहले अरबन सीलिंग के तहत आ गई थी। इसे बाद में ग्राम समाज में शामिल कर लिया गया।
इसके बाद में भूमि के मालिक जिला प्रशासन के खिलाफ अदालत चले गए। जिस पर अदालत ने स्टे ऑर्डर कर दिया, लेकिन यह जमीन आसाराम बापू आश्रम के ही कब्जे में है। जिसको फिलहाल अधिग्रहित नहीं किया जा सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि अदालत से अगर फैसला प्रशासन के पक्ष में आ गया तो इसका भी अधिग्रहण किया जा सकेगा। फिलहाल जो भूमि निजी संपत्ति है, उसको ही कब्जे में लिया जाएगा।
सीडी का मुफ्त वितरण
आसाराम बापू की गिरफ्तारी से पहले यहां अनेक आयोजन हुआ करते थे। समय-समय पर गुरु वंदना होती थी। यहां एक गुरुकुल का भी संचालन किया जाता है, जहां बच्चों को शिक्षा-दीक्षा दिए जाने का दावा किया जाता है।
मगर अब यह गतिविधियां बहुत कम हो गई हैं। यह बात दीगर है कि यहां पर कुछ कार्यकर्ता आसाराम पर लगे आरोपों से संबंधित वीडियो सीडी का वितरण नि:शुल्क करते हैं। इन सीडी के माध्यम से सभी तरह के आरोपों को निराधार बताया गया है।