प्रदेश के गोरखपुर, वाराणसी एवं बरेली के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (एआरटीओ) को परिवहन निगम की अनुबंधित बसों को अवैध बताकर कार्रवाई करना उस वक्त महंगा पड़ गया, जब ऑपरेटरों ने एमडी से इसकी शिकायत कर दी।
निगम के एमडी ने एआरटीओ की मनमानी के बारे में परिवहन आयुक्त को अवगत कराया। इसके बाद परिवहन आयुक्त ने एआरटीओ को फटकार लगाते हुए सीज अनुबंधित बसों को छोड़ने और प्रकरण की रिपोर्ट मुख्यालय भेजने का निर्देश दिया।
उत्तर प्रदेश अनुबंधित बस ओनर्स एसोसिएशन के महामंत्री अजीत सिंह ने सोमवार को बताया कि परिवहन विभाग के चेकिंग दस्ते ने हफ्ते भर के भीतर गोरखपुर में पांच, वाराणसी में सात और बरेली में तीन अनुबंधित बसों को सीज कर दिया।
वहीं, गोरखपुर में 10 और वाराणसी में छह अनुबंधित बसों का चालान किया जा चुका है। चेकिंग दस्ते निगम की अनुबंधित बसों के संचालन को अवैध बताकर उनके ड्राइवरों को परेशान कर रहे हैं।
अनुबंधित बसों का संचालन प्रभावित होने से यात्रियों को भी दिक्कत हो रही है। सोमवार को गोरखपुर के ऑपरेटरों ने विनोद पांडेय व महामंत्री की अगुवाई में एमडी पार्थ सारथी सेन शर्मा से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी।
इसके बाद एमडी खुद इस प्रकरण को लेकर परिवहन आयुक्त रजनीश गुप्ता के पास पहुंचे। आयुक्त ने तीनों जिलों के एआरटीओ को फटकार लगाते हुए सीज अनुबंधित बसों को छोड़ने का निर्देश दिया।