सेना में शामिल होने के लिए अब अभ्यर्थियों को 20 सेकंड का समय बचाना होगा। हालांकि इससे अभ्यर्थियों को दौड़ में बेहतर अंक हासिल हो सकेंगे।
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पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद सेना ने दौड़ की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए चार वर्गों के बजाय केवल दो वर्गों में ही दौड़ पूरी करने की नई व्यवस्था लागू की है।
सेना अगले माह होने वाली भर्ती रैली में दो वर्गों में भर्ती रैली आयोजित करेगी। यह नई व्यवस्था सैनिक जीडी सहित सभी पदों के उम्मीदवारों के लिए होगी।
पहले ऐसी थी प्रक्रिया
सेना 1600 मीटर की दौड़ को 5:40 मिनट तक पूरी करने पर 60 अंक जबकि 5:41 से 5:50 मिनट में दौड़ पूरी करने पर 48 अंक देती थी।
5:51 मिनट से 6:05 मिनट तक दौड़ पूरी करने में 36 अंक और 6:06 से 6:20 मिनट तक का समय निकालने वाले अभ्यर्थियों को 24 अंक दिए जाते थे।
दौड़ में 6:21 मिनट या इससे अधिक का समय लगाने वाले को फेल माना जाता था। सेना अपने छह भर्ती मुख्यालयों के अधीन आने वाले सभी जिलों के लिए साल में दो भर्ती कैलेंडर बनाकर रैलियां करती है।
एक अप्रैल से 30 अक्तूबर तक पहला जबकि एक नवंबर से 31 मार्च तक दूसरा कैलेंडर होता है। हर कैलेंडर में छह रैलियां होती हैं।
दौड़ में बेहतर अभ्यर्थियों का चयन हो सके इसके लिए सेना ने मार्च में सेना मेडिकल कोर की यूनिट हेड कोटा की भर्ती में जीडी के पदों के लिए दो वर्गों की भर्ती दौड़ शुरू की थी।
पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इसे एक अप्रैल से शुरू हुए नए कैलेंडर में भर्ती दौड़ की नई व्यवस्था लागू किया गया है। पहली भर्ती मई में होगी।
इंटरनेट पर देखें रिजल्ट
सेना में भर्ती होने का परिणाम का पता लगाने के लिए अब अभ्यर्थियों को भर्ती कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
जल्द ही अभ्यर्थी इंटरनेट पर अपना परिणाम हासिल कर सकेंगे। सेना भर्ती परिणाम घोषित करने की नई व्यवस्था अगले तीन से चार माह में लागू करने जा रही है।
इसके लिए सेना ने एनआईसी के सर्वर पर एक स्वतंत्र वेबसाइट बनाने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के शुरू होने से सेना में भर्ती कराने का झांसा देने वाले दलालों पर अंकुश लग सकेगा।
दरअसल उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में भर्ती रैली के दौरान शारीरिक दक्षता, मेडिकल जांच और लिखित परीक्षा के बाद परिणाम को नोटिस बोर्ड पर चस्पा किया जाता है।
अपने परिणाम का पता लगाने के लिए अभ्यर्थियों को अपने जिलों से भर्ती मुख्यालय तक के चक्कर काटने पड़ते हैं।
वहीं दलालों की घुसपैठ के चलते कई बार सेना की परिणाम घोषित करने की इस व्यवस्था पर सवालिया निशान भी लगे हैं।
फर्जीवाड़ा रुकेगा
लखनऊ सेना भर्ती मुख्यालय की नोटिस बोर्ड पर ही वर्ष 2007 में फर्जी परिणाम चस्पा कर दिया गया था। साथ ही अभ्यर्थियों ने कई बार बोलकर परिणाम बताने को अव्यवहारिक बताया था।
नोटिस बोर्ड पर लगे परिणाम को कई बार अभ्यर्थी फाड़ देते हैं जिससे दूसरे उम्मीदवारों को खासी दिक्कत भी होती है।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मध्य प्रदेश सरकार एनआईसी सर्वर की मदद से भर्ती परिणाम को वेबसाइट पर अपलोड करता है।
इसे देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सहित सभी 13 जोनल भर्ती मुख्यालयों को एक स्वतंत्र वेबसाइट से जोड़ने का प्लान बनाया है।
ऐसे होगा काम
सेना के जोनल भर्ती मुख्यालयों के अंतर्गत आने वाले सहायक भर्ती मुख्यालयों को जोड़ा जाएगा। सहायक भर्ती मुख्यालय अपने यहां के भर्ती परिणाम को जोनल भर्ती मुख्यालय भेजेगा।
यहां से एनआईसी के सर्वर पर भर्ती मुख्यालय की वेबसाइट पर परिणाम 24 घंटे में अपलोड होगा।
वास्तविक अभ्यर्थी ही अपने परिणाम की जानकारी हासिल कर सकें इसके लिए भी काम चल रहा है।
लखनऊ छावनी स्थित सेना जोनल भर्ती मुख्यालय के अंतर्गत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 9 सहायक भर्ती मुख्यालय आते हैं।
इसमें उत्तर प्रदेश में लखनऊ जोनल मुख्यालय के साथ ही बरेली, आगरा, मेरठ, वाराणसी और अमेठी जबकि उत्तराखंड में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, लैंसडाउन शाखा भर्ती मुख्यालयों के अंतर्गत इन राज्यों के सभी जिले की भर्ती रैलियां होती हैं।
जोनल मुख्यालय से परिणाम शाखा भर्ती मुख्यालय को भेजा जाता है।
जहां शाखा भर्ती मुख्यालय नोटिस बोर्ड पर उसे चस्पा करने के साथ एक लिस्ट लेकर सैन्य कर्मी उसकी घोषणा भी करता है।