थानेदारों की तैनाती के लिए अब जिलाधिकारियों की इजाजत लेनी जरूरी होगी। गृह विभाग ने सभी पुलिस अधीक्षकों व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को पुराने शासनादेश की याद दिलाते हुए इसे सुनिश्चित करने को कहा है। हालांकि कई जिलों में इसका पालन भी हो रहा है, लेकिन कुछ जिलों से मिली शिकायतों के बाद इसे कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि थानों पर इंस्पेक्टर व एसओ की तैनाती के लिए जिलाधिकारी का अनुमोदन जरूरी है। जिलों में तैनात अधिकारी इसका पालन सुनिश्चित करें, इसके लिए उन्हें 2 अगस्त 2001 और 9 फरवरी 2009 को जारी शासनादेश और पुलिस रेगुलेशन एक्ट की याद दिलाई गई है। वहीं, पुलिस महकमे के अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था पुरानी है और इसका अनुपालन भी हो रहा है।
दरअसल कई बार जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान के बीच तालमेल न बैठने के कारण थानेदारों की पोस्टिंग डीएम और कप्तान के हितों के टकराव के रूप में सामने आती है। ऐसी स्थिति में रेंज स्तर पर डीआईजी को अधिकार दिए गए हैं कि वह तैनाती को लेकर निर्णय लें।
हालांकि अधिकतर जिलों में आपसी तालमेल की वजह से इसमें कोई दिक्कत नहीं आती थी, लेकिन नया शासनादेश जारी होने को एक बार फिर आईपीएस और आईएएस के बीच नए विवाद के रूप में देखा जा रहा है।