बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने कहा कि वह नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से सहमत नहीं है। बसपा शुरू से इसका विरोध कर रही है। सीएए पहली नजर में विभाजनकारी व असंवैधानिक है। इस्लाम को छोड़ अन्य धर्मों पर सीएए लागू करना ठीक नहीं है। पाकिस्तान में रहने वाले मुस्लिम भी शोषित-पीड़ित हो सकते हैं, किसी के भी साथ भी ज्यादती हो सकती है। केंद्र सरकार को संसद का सत्र बुलाकर इस पर पुनिर्वचार करना चाहिए।
विज्ञापन
मायावती ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में अपने जन्म दिन पर स्वलिखित पुस्तक ’मेरा संघर्षमय जीवन एवं बी.एस.पी. मूवमेंट का सफरनामा’ जारी किया। सीएए, एनआरसी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि ये फैसले नोटबंदी की तरह देश के130 करोड़ लोगों के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे। केंद्र सरकार को आम सहमति बनाकर नागरिकता संशोधन कानून लाना चाहिए था। सरकार की जिद व अड़ियल रवैये के कारण ही लोगों में अनेक भ्रांतियां हैं। देश भर में हर जगह अप्रत्याशित व अभूतपूर्व विरोध हो रहा है। केंद्र ने सीएए मामले में किसी को विश्वास में नहीं लिया है। यह धर्म विशेष के खिलाफ है, विभाजनकारी और असंवैधानिक है।
उन्होंने कहा, इस्लाम को मानने वालों को छोड़कर अन्य मजहबों पर सीएए लागू करना ठीक नहीं है। पाकिस्तान में भी सभी मुसलमान अमन-चैन से नहीं रहते। भारत से गए मुसलमानों के साथ पाक में ज्यादती हो सकती है। जुल्म-ज्यादती किसी के भी साथ हो सकती है। सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान को धर्मनिरपेक्ष बनाया था। एनपीआर से जुड़े सवाल पर कहा कि जब यह आएगा तब अपना स्टैंड बताएंगी।
कांग्रेस के रास्ते पर भाजपा, गलत नीतियों से बढ़ा आर्थिक और सामाजिक संकट
मायावती
- फोटो : अमर उजाला
मायावती ने कहा, देश की 130 करोड़ जनता के दुख, तकलीफ बढ़ते जा रहे हैं। गंभीर, राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक संकट से भयंकर गरीबी व बेरोजगारी है। ऐसे ही हालात जनता ने पहले कांग्रेस की सरकारों में भी देखे और झेले हैं। केंद्र की भाजपा सरकार भी अब कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों के ही रास्तों पर चल रही है। कांग्रेस की तरह भाजपा सरकार भी राजनीतिक व व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सत्ता का घोर दुरुपयोग कर रही है। कांग्रेस की तरह भाजपा सरकार ने जनहित, जनकल्याण व व्यापक देशहित के मुद्दों को ताक पर रख दिया है,। नतीजतन, गरीबी, अशिक्षा, बेरोजबारी, हिंसा, तनाव, नफरत व अराजकता का ही माहौल बना हुआ है
एक ही थैली चट्टे-बट्टे कांग्रेस-भाजपा
मायावती ने कहा, कांग्रेस व भाजपा को एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। बसपा इनसे पूरी दूरी बनाकर मुद्दों पर गुण व दोष के आधार पर ही केंद्र सरकारों को समर्थन देती है। यही वजह है कि आग्रह के बावजूद बसपा केंद्र की किसी भी पार्टी की सरकार में शामिल नहीं हुई है। उन्होंने कहा, भाजपा सरकार की विफलताओं को भुनाकर कांग्रेस राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगी है। सभी जानते हैं कि कांग्रेस के राज में पूरा देश गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक हिंसा, दंगा व तनाव से पीड़ित रहा है। भाजपा की केंद्र सरकार में भी गरीबी, बेरोजगारी के साथ-साथ हर प्रकार की अव्यवस्था, अराजकता, हिंसा व तनाव की गंभीर समस्या अब कांग्रेस पार्टी के शासनकाल से भी दो कदम आगे चली गई है।
कांग्रेस को भाजपा की आलोचना का हक नहीं
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस को, देश व समाज की बदहाली के मामले में भाजपा की आलोचना करने का नैतिक अधिकार नहीं है। कांग्रेस जब भाजपा सरकार की आलोचना करती है तो लोगों के दिलों-दिमाग पर उसका जल्द असर नहीं पड़ता। इसका मतलब भाजपा सरकार को यह कतई नहीं समझना चाहिए कि केवल कांग्रेस से अपनी सरकार की तुलना करके वह जनता की पैनी जांच-परख से बच जाएगी। भाजपा यदि कांग्रेस के ही पैटर्न पर लगातार चलती रही तो राज्यों से एक-एक करके विदा होने के बाद उसकी स्थिति कांग्रेस से भी कहीं बदतर हो जाएगी। कांग्रेस जो जनविरोधी काम छिपकर करती थी, वही भाजपा सरकार खुल्लम खुल्ला कर रही है। कहा कि भाजपा व कांग्रेस में झूठ बोलने की घिनौनी राजनीति चल रही है।
आरक्षण को लेकर जताई चिंता:
बसपा सुप्रीमो ने कहा, केंद्र व राज्य सरकारों के ज्यादातर बड़े-बड़े सरकारी काम इनके चहेते बड़े-बड़े उद्योगपतियों को ही दिए जा रहे हैं। इन तामों में नौकरियों, खासकर एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। अब इन वर्गों का सरकारी नौकरियों में आरक्षण नाम-मात्र के लिए ही बचा रह गया है। इसे लेकर बसपा काफी ज्यादा चिंतित है। इसी के साथ किसानों की भी हालत अब बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है। उन्होंने बसपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अति-गरीबों, असहाय व कमजोर वर्गों, मुसीबतों से घिरे नौजवानों, छात्र-छात्राओं व दूसरे जरूरतमंद लोगों की ज्यादा से ज्यादा मदद करें।
यूपी में जंगलराज, क्या अपने एमपी, एमएलए पर कार्रवाई करेगी भाजपा
लखनऊ व नोएडा में पुलिस कमिश्नर प्रणाली संबंधी सवाल पर मायावती ने कहा कि जब तक सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम नहीं करेगी, तब तक इस प्रकार के कदम उठाने का कोई लाभ जनता को नहीं मिलने वाला है। यह किसी से छिपा नहीं है कि यूपी में कानून का राज नहीं बल्कि जंगलराज है। मां-बहनों की इज्जत सुरक्षित नहीं है। मैने अपनी सरकार में कानून हाथ में लेने वाले अपने एमपी, एमएलए को भी नहीं छोड़ा था। क्या भाजपा सरकार भी अपनी पार्टी के सांसदों, विधायकों व अन्य आपराधिक तत्वों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करकेदिखा सकती है? उन्होंने कहा, मैं कमिश्नर व्यवस्था के खिलाफ नहीं हूं लेकिन केवल नई व्यवस्था बनाने से नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति से ही कानून-व्यवस्था बेहतर की जा सकती है। प्रदेश सरकार में अभी तक यह इच्छा शक्ति नहीं दिखाई पड़ी है। इसके बिना हजार कदम उठा लें, लॉ एंड ऑर्डर सुधरने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, सरकार को संकीर्ण सोच, जातिवादी द्वेष व सांप्रदायिकता के जहर को त्यागना होगा तभी इसका सही लाभ आम जनता को मिल पाएगा।