लखनऊ विश्वविद्यालय में पीएचडी आवेदन प्रक्रिया बुधवार शाम से शुरू हो जाएगी। आवेदन की अंतिम तारीख 20 दिसंबर निर्धारित की गई है। विलंब शुल्क के साथ आवेदन 26 दिसंबर तक किए जा सकेंगे। सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए आवेदन शुल्क दो हजार रुपये तथा एससी-एसटी अभ्यर्थियों के लिए एक हजार रुपये निर्धारित किया गया है।
राजभवन ने पीएचडी के प्रस्तावित अध्यादेश पर अपनी मुहर लगा दी है। राजभवन से मंजूरी के बाद लविवि अध्यादेश को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर रहा है। लविवि में पिछले शैक्षिक सत्र में पीएचडी दाखिले नहीं हो सके थे।
उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के लिए यूजीसी अध्यादेश-2016 के हिसाब से पीएचडी दाखिले करने का शासनादेश जारी किया था। इसके बाद लविवि ने यूजीसी अध्यादेश को 22 अक्तूबर को हुई एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद से पास कराकर राजभवन भेजा था। राजभवन ने इसे मंजूरी दे दी है।
विवि ने इससे नवंबर के पहले सप्ताह से दाखिले की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी। लेकिन अभी तक अध्यादेश विवि की वेबसाइट पर अपलोड नहीं था। कुलसचिव शैलेश कुमार शुक्ल के अनुसार अध्यादेश को मंजूरी मिलने के बाद आवेदन प्रक्रिया बुधवार शाम से शुरू कर दी जाएगी। ।
शोधपत्र छपने की अनिवार्यता में छूट नहीं
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लविवि कुलसचिव शैलेश शुक्ला ने कहा कि प्रस्तावित अध्यादेश में असिस्टेंट प्रोफेसर को नियुक्ति के बाद न्यूनतम तीन साल का अनुभव होने की शर्त नहीं रखी गई है। उनके अनुसार बैठक में इस पर चर्चा हुई थी, लेकिन यूजीसी का अध्यादेश ज्यों का त्यों लागू हुआ है।
इसलिए इस तरह की शर्त उसमें नहीं रखी गई है। इससे पहले इस बात की चर्चा थी कि असिस्टेंट प्रोफेसर तभी पीएचडी गाइड बन सकता है जबकि उसने नियुक्ति के बाद तीन साल पूरे कर लिए हों।
लविवि के अध्यादेश के अनुसार सिर्फ वही प्रोफेसर पीएचडी करा सकेंगे, जिनके कम से कम पांच शोधपत्र यूजीसी की संदर्भित पत्रिका में छप चुके हों। एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर को पीएचडी धारक और कम से कम दो शोधपत्र प्रकाशित होने पर ही शोध पर्यवेक्षक बनाया जाएगा। इसमें किसी प्रकार की छूट नहीं है।
नया अध्यादेश से दाखिले करने वाला लविवि पहला राज्य विवि
लखनऊ यूनिवर्सिटी
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लविवि में अभी तक पीएचडी की सीट संख्या तय नहीं हुई हैं। असल में शोधपत्र छपने तथा कार्य अनुभव जैसी शर्त होने की वजह से कई विभाग और कॉलेजों ने अपनी सीटों का ब्योरा नहीं भेजा है। इसी वजह से पीएचडी की सीट अभी तय नहीं हुई हैं।
अध्यादेश के अनुसार एक प्रोफेसर एक समय में तीन एमफिल और आठ पीएचडी शोधार्थियों का गाइड बन सकता है। एसोसिएट प्रोफेसर एक समय में दो एमफिल और छह पीएचडी तथा असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए यह सीमा एक एमफिल और चार पीएचडी शोधार्थियों की है। इसी के आधार पर अंतिम संख्या बुधवार को तय होगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय एक बार फिर से प्रदेश में अव्वल साबित हुआ है। यूजीसी अध्यादेश-2016 के अनुसार दाखिले करने वाला लखनऊ विवि प्रदेश का पहला राज्य विवि बन गया है। कुलसचिव शैलेश कुमार शुक्ल के अनुसार विवि ने राज्य सरकार के शासनादेश का पालन करते हुए अध्यादेश को पूरी तरह से लागू किया है।