लखनऊ। शहर के मशहूर व्यंग्यकार और अट्टहास समारोह के संस्थापक अनूप श्रीवास्तव का सोमवार रात निधन हो गया। इससे राजधानी के साहित्यकारों में शोक छा गया है। वे अट्टहास पत्रिका के संपादक थे। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार भैंसाकुंड घाट पर किया गया। इस मौके पर उनके परिजन व बड़ी संख्या में साहित्यकार मौजूद रहे।
82 वर्षीय अनूप श्रीवास्तव के भतीजे आशीष ने बताया कि सोमवार रात भोजन करने के बाद उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई तो परिजन विवेकानंद हॉस्पिटल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वरिष्ठ कवि सर्वेश अस्थाना ने बताया कि अलीगंज स्थित सेक्टर-सी पत्रकार कॉलोनी निवासी अनूप श्रीवास्तव बेहतरीन व्यंग्यकार थे। उनका जन्म सीतापुर में हुआ था और वे एक प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र के संपादक भी रहे। वे अपने पीछे पत्नी मंजू, पुत्री शिल्पा और पुत्र अभिषेक को छोड़ गए हैं। बेटा बंगलूरू में इंजीनियर है और बेटी दिल्ली में रहती है। दोनों मंगलवार को लखनऊ पहुंचे।
अनूप श्रीवास्तव के निधन पर साहित्यकार सुधाकर अदीब, मुकुल महान, अशोक झंझटी, अलंकार रस्तोगी, पंकज प्रसून, आलोक शुक्ला, विशाल श्रीवास्तव, रजनीकांत वशिष्ठ, सबाहत हुसैन, धीरज मिश्रा, राजेंद्र वर्मा आदि ने शोक व्यक्त किया। वरिष्ठ हास्य-व्यंग्य कवि तेज नारायन शर्मा, मुकुल महान, महेंद्र भीष्म ने भी शोक जताया।
व्यंग्यकारों में लोकप्रिय रहा अट्टहास सम्मान
अनूप श्रीवास्तव 1990 से अट्टहास समारोह का आयोजन करते थे, जिसमें अट्टहास सम्मान से रचनाकारों को सम्मानित किया जाता था। पहला अट्टहास सम्मान मनोहर श्याम जोशी को दिया गया था। इसके अलावा शरद जोशी, श्रीलाल शुक्ल, हुल्लड़ मुरादाबादी, माणिक वर्मा, केपी सक्सेना, अशोक चक्रधर, गोपाल चतुर्वेदी, प्रदीप चौबे जैसी रचनाकारों को यह सम्मान दिया जा चुका है। पिछले दिनों उनकी पुस्तक ‘अंतरात्मा का जंतर-मंतर’ काफी चर्चित रही। हाल ही में उन्हें जबलपुर में प्रतिष्ठित कादंबरी सम्मान से नवाजा गया था। आंखों में अहसास भी उनकी चर्चित पुस्तक रही।