राजधानी की अंशुलिका दुबे को फोर्ब्स मैग्जीन द्वारा एशिया के ऐसे टॉप 30 उद्यमियों में शामिल किया गया है जो 30 वर्ष से कम उम्र के हैं। अपनी ऑनलाइन कंपनी के जरिए वे ऐसे प्रोजेक्ट्स को फंडिंग में मदद करती हैं जो क्रिएटिव हैं, लेकिन पैसों की कमी की वजह से फंसे हुए हैं। अमर उजाला ने उनसे बात कर उनके इस अनूठे प्रयास के बारे में जाना।
लखनऊ के गोमतीनगर के एक पब्लिक स्कूल से पास आउट अंशुलिका ने बताया कि वे कॉमर्स स्टूडेंट थीं और कुछ अलग करने की इच्छा रखती थीं। 2004 में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस में इंग्लिश लिटरेचर ऑनर्स कोर्स में एडमीशन लिया।
इसे पूरा करने पर उन्हें एक कंसल्टेंसी कंपनी मैकिंजी के साथ यूएस में काम करने का मौका मिला। अंशुलिका बताती हैं कि लेकिन साढे च़ार वर्ष बाद वे लौट आईं। उन्हें कुछ अलग करना था। 2012 में मुंबई में रहकर wishberry.in की शुरुआत की।
इसमें उनकी दोस्त सहयोगी रहीं। वहीं वे बताती हैं कि अपनी स्टार्ट अप कंपनी का विचार उन्हें ऐसे लोगों से मिलकर आया जो अनोखे और क्रिएटिव विचार रखते थे, लेकिन फंड नहीं होने से उन्हें हकीकत में नहीं ढाल पा रहे थे। ऐसे में उन्हें विचार आया कि अगर उनके काम को पसंद करने वाले ही अगर उन्हें फंड करें तो मुश्किल आसान हो सकती है।
यहीं वे विशबैरी शुरू हुआ। कुछ शॉर्ट फिल्में, गायकों के एल्बम और लेखन को फंड किया जाने लगा। अंशुलिका बताती हैं कि उन्हें हर महीने 60 से 70 प्रोजेक्ट लेकर क्रिएटिव आर्टिस्ट्स फंड की उम्मीद से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन सभी के लिए मदद जुटा पाना संभव नहीं है।
ऐसे में हर महीने 10 प्रोजेक्ट चुनकर उन पर काम किया जाता है। उनके इस प्रयास से अब तक 250 से अधिक प्रोजेक्ट्स को साढ़े करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई जा चुकी है। ये सभी फाइन आर्ट्स, फिल्म, संगीत, उद्योग और लेखन के 10 क्षेत्रों से जुड़े हैं।