मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की घोषणा पूरी करने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग फिर से मदरसों को अनुदान देने के लिए आवेदन मांगेगा। यह आवेदन इसलिए मांगे जाएंगे क्योंकि मानक घटाने के बावजूद मात्र 99 मदरसे ही अनुदान के लिए फिट मिले हैं।
जबकि मुख्यमंत्री ने 146 मदरसों को अनुदान देने की घोषणा की थी। ऐसे में बचे हुए 47 मदरसों के लिए दोबारा आवेदन मांगे जाने की तैयारी है।
सूबे में जब सपा की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 146 मदरसों को अनुदान देने की घोषणा की थी। इस घोषणा को वित्त विभाग ने उस समय दो वित्तीय वर्ष में पूरा करने की सलाह दी थी, लेकिन तीन वर्ष से ज्यादा बीत चुके हैं और अभी तक मदरसों को अनुदान नहीं मिल सका है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रदेश सरकार ने 146 मदरसों की संख्या पूरी करने के लिए वर्ष 2003 तक स्थाई मान्यता पाने वाले मदरसों के आवेदन मंगाए। सरकार के पास 194 मदरसों के जो आवेदन आए। उनमें अधिकतर मानक पूरे नहीं करते थे। सीएम की घोषणा पूरी करने के लिए बाद में मानकों को ही शिथिल कर दिया गया।
छह मदरसों को हाईकोर्ट के दखल के बाद अनुदान
मदरसा प्रबंधकों को कमियां दूर करने के लिए समय भी दिया गया। इसके बाद फिर से आवेदन पत्र मंगाए गए, लेकिन इसमें भी मात्र 93 मदरसे फिट मिले हैं। जबकि छह को हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार पहले ही अनुदान दे चुकी है।
ऐसे में कुल 99 मदरसे ही मानक शिथिल करने के बाद कागजों में पूरी तरह दुरुस्त मिले। अब इनके प्रस्ताव कैबिनेट में ले जाकर इन्हें अनुदान देने की तैयारी है।
वहीं, बचे हुए मदरसों के लिए विभाग फिर से आवेदन मांगने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। आवेदन मांगने के बाद स्थाई मान्यता प्राप्त मदरसे इसमें आवेदन कर सकेंगे। आवेदन आने के बाद सरकार इन्हीं में से बचे हुए 47 मदरसों को अनुदान देगी।
2004-05 में मान्यता पाने वालों को मिल सकता है मौका
अभी तक सरकार ने वर्ष 2003 में मान्यता पाने वाले मदरसों के आवेदन मंगाए थे। अब वर्ष 2004-05 में मान्यता पाने वाले मदरसों को अनुदान मिल सकता है।
सरकार अब वर्ष 2004 के बाद के मदरसों से आवेदन पत्र मांग सकती है। इनमें जो भी मानकों में फिट बैठेंगे सरकार उन्हें अनुदान प्रदान कर देगी।
एक मदरसे पर 50 लाख का बोझ
एक मदरसे को अनुदान देने में सरकार पर करीब 50 लाख रुपये सालाना का बोझ आता है। यहां तैनात एक प्रधानाचार्य व 12 शिक्षकों (आलिया के लिए चार, फौकानिया के लिए तीन व तहतानिया के लिए पांच) के साथ ही एक क्लर्क व एक चपरासी का पूरा वेतन सरकार देती है।
मदरसा अनुदानित होने के बाद कई तरह की अन्य सुविधाएं व योजनाओं का लाभ भी मिलने लगता है।