राज्य विद्युत उत्पादन निगम के पारीछा बिजलीघर की 250 मेगावाट क्षमता की एक और इकाई के बंद हो जाने से सूबे में बिजली की उपलब्धता और कम हो गई है।
बुधवार रात से लेकर बृहस्पतिवार दोपहर तक तो प्रदेश में जबर्दस्त किल्लत रही और भारी आपात कटौती भी की गई। हालांकि दोपहर बाद लखनऊ समेत प्रदेश के कई हिस्सों में हुई जोरदार बारिश से बिजली की मांग में कमी आई है।
शाम से प्रदेश के लोगों को कटौती से थोड़ी राहत मिली। हालांकि पूरे प्रदेश में शिड्यूल के मुताबिक आपूर्ति का दावा किया जा रहा है।
पारीछा की 250 मेगावाट क्षमता की एक और इकाई के तकनीकी गड़बड़ी के चलते बंद होने से बुधवार आधी रात के बाद प्रदेश में बिजली संकट और गहरा गया।
पारीछा की दो इकाइयां पहले से ही बंद हैं जबकि अनपरा ‘सी’ की एक इकाई के भी कोयले की कमी के कारण बंद हो जाने से उपलब्धता कम हो गई।
बृहस्पतिवार दोपहर तक प्रदेश में बिजली की मांग 11,500 मेगावाट के आसपास थी जबकि उपलब्धता 10,000 मेगावाट के करीब रही।
राज्य का तापीय उत्पादन घटकर 1700 मेगावाट के आसपास रह गया है। भारी कमी के चलते बीते 24 घंटों के दौरान गांवों को लगभग 6 घंटे ही बिजली आपूर्ति की जा सकी।
जिलों को 14 घंटे, मंडलों को 18 घंटे, बुंदेलखंड को 14 घंटे तथा महानगरों को 19 घंटे बिजली दी गई।
बारिश न होती तो खराब होते हालात
बारिश के चलते प्रदेश में बिजली की मांग में लगभग 1000 मेगावाट की कमी आई है जिससे आपूर्ति पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। अभियंताओं का कहना है कि बारिश न होती तो बृहस्पतिवार हालात ज्यादा खराब हो सकते थे। मौसम बदलने की वजह से अगले तीन-चार दिन तक कोई खास दिक्कत आने की संभावना नहीं है।