विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल का ज्यादातर हिस्सा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अमौसी एअरपोर्ट पर प्रयागराज जाने से रोकने के खिलाफ सपा व अन्य विपक्षी दलों के हंगामे की भेंट चढ़ गया। इससे सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। सदन व्यवस्थित न होने पर विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने हंगामे के बीच आवश्यक विधायी कामकाज की औपचारिकता पूरी कराई और करीब पौने एक बजे कार्यवाही बुधवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी। हंगामे से वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट पर चर्चा भी नहीं हो सकी।
सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद प्रश्नकाल में सदस्यों के तीसरे सवाल पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना जवाब दे ही रहे थे कि सपा के नरेंद्र वर्मा व शैलेंद्र यादव ललई ने इलाहाबाद विवि के छात्रसंघ के कार्यक्रम में जाने से अखिलेश को अमौसी एअरपोर्ट पर रोकने का मामला उठा दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने सपा सदस्यों से मंत्री का जवाब पूरा हो जाने का अनुरोध किया।
लेकिन सपा सदस्य देखते ही देखते ‘वेल’ में पहुंच गए सरकार पर लोकतंत्र का गला घोटने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष ने कहा कि वास्तव में सदस्य प्रश्न न कराकर लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं और वेल में रहकर लोकतंत्र की सेवा कैसे हो रही है? लेकिन सपा सदस्यों पर अध्यक्ष की बातों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इस दौरान बसपा व कांग्रेस सदस्य अपनी सीटों पर बैठे रहे। करीब 11.25 बजे अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद स्थगन 12.20 बजे तक और फिर 10 मिनट तक बढ़ा दिया गया।
साढ़े 12 बजे कार्यवाही फिर शुरू होने पर अध्यक्ष ने सदस्यों से सीट पर पहुंचकर अपनी बात रखने की अपील की, लेकिन सपाई जोर-जोर नारेबाजी करने लगे। इस बार बसपा और कांग्रेस सदस्य भी सपा के साथ वेल में पहुंच गए। अध्यक्ष ने कहा कि सदन में धरना लोकतंत्र का हिस्सा नहीं है। इस पर विपक्षी नहीं माने तो हंगामे के बीच ही एजेंडे से जुड़ी विधायी कार्यवाही पूरी कराई गई और 12.48 बजे सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।