मानदेय में 800 रुपये की बढ़ोतरी के सरकार के एलान के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना बुधवार को खत्म हो गया। उन्होंने राज्य कर्मचारी का दर्जा और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार सुबह से अपना आंदोलन शुरू किया था।
विज्ञापन
संकल्प वाटिका के पास महिलाएं रात भर सड़क पर डटी रहीं। उनके हटने के बाद राजधानी ने राहत की सांस ली। हालांकि मानदेय में मामूली वृद्धि होने से कार्यकर्ताओं के कई गुट बन गए और कुछ महिलाएं प्रदर्शन जारी रखने पर अड़ गईं।
नेताओं के समझाने और आंदोलन जारी रखने के आश्वासन के बाद महिलाओं ने सड़क से कब्जा हटाया। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के आह्वान पर महिला कर्मचारियों के हुजूम ने मंगलवार से ही शहर को पूरी तरह जाम कर रखा था। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
विज्ञापन
इससे नाराज सैकड़ों महिलाओं ने संकल्प वाटिका वाली रोड पर कब्जा कर हजरतगंज से निशातगंज जाने वाली सड़क पूरी तरह जाम कर दी। महिलाएं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से वार्ता किए बगैर हटने को तैयार नहीं थीं। प्रशासन ने बुधवार सुबह 11 बजे सीएम से वार्ता का समय दिलाया। इसके बावजूद महिलाएं सड़क से नहीं हटीं।
मुख्यमंत्री ने जताई असमर्थता, कहा 18 हजार नहीं कर सकते
बुधवार सुबह विभिन्न आंगनबाड़ी संगठनों की करीब 12 महिलाओं की सीएम से मुलाकात कराई गई। वार्ता में शामिल आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता संघ की अध्यक्ष बालेश सैनी ने बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मानदेय 18,000 रुपये करने में असमर्थता जताते हुए कहा कि अब बजट हमारे हाथ में नहीं है।
उन्होंने प्रमुख सचिव बाल विकास पुष्टाहार डिंपल वर्मा से इस बाबत वित्त विभाग से जानकारी लेने को कहा। इसके बाद उन्होंने मानदेय 800 रुपये बढ़ाने की घोषणा कर दी। अभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 3200 रुपये मिलता था, अब 4000 मिलेगा।
वहीं, सहायिकाओं के मानदेय में 400 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इन्हें अब 2000 और छोटे आंगनबाड़ी केंद्रों के कर्मियों को 2600 के बजाय से 3000 रुपये मिलेंगे। वार्ता में गीतांजलि मौर्या, सीमा यादव, ऊषा वर्मा, राम देवी आदि शामिल रहीं।
मामूली इजाफे से भड़कीं महिलाएं
मानदेय में 800 की मामूली वृद्धि की खबर सुनकर प्रदर्शनकारी महिलाएं भड़क गईं। नेताओं के प्रदर्शन खत्म करने के एलान के बावजूद काफी संख्या में महिलाएं धरना देने पर अड़ी रहीं।
उनका कहना था कि मानदेय 18,000 हजार करने की मांग थी, संगठन के नेताओं ने धोखा दिया है। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष नीलम पांडेय ने कलमबंद हड़ताल करने और आंदोलन जारी रखने की बात कही। इसके बाद महिलाओं ने सड़क से कब्जा हटा लिया।
दो महिलाएं बीमार, मची अफरातफरी
प्रदर्शन के दौरान आगरा की मंजू शर्मा के सीने में दर्द उठने से अफरातफरी मच गई। साथी महिलाओं ने उन्हें 108 एंबुलेंस से ले जाकर सिविल में भर्ती कराया। इसबीच सुनीता यादव भी गश खाकर गिर गईं। साथी महिलाओं ने उन्हें उठाकर एंबुलेंस की तलाश शुरू की तो एंबुलेंस जा चुकी थी। इससे महिलाओं का गुस्सा बढ़ गया। बाद में पुलिस ने अपनी जिप्सी से महिला को अस्पताल पहुंचाया।
महिला के बेहोश होने पर जब एंबुलेंस नहीं मिली तो आक्रोशित महिलाओं ने पुलिस और प्रशासन को लताड़ना शुरू किया। इसके बाद दरोगा शिव शंकर सिंह महिलाओं पर भड़क गए। वह महिलाओं को पीटने की धमकी देने लगे।
संकल्प वाटिका के सामने निर्माण निगम का कार्यालय भी दो दिन तक महिलाओं के कब्जे में रहा। उन्होंने अपने नहाने, कपड़े धोने और सुखाने का बंदोबस्त यहीं पर कर रखा था। सैकड़ों महिलाओं ने यहां पार्क में अपना डेरा जमा लिया था।
ठेले खोमचे वालों की चांदी, गंदगी की भरमार
हजारों की संख्या में जुटी महिलाओं के प्रदर्शन से ठेले व खोमचे वालों की चांदी रही। सेब, केला, लाई- चना, कुल्फी, आइसक्रीम वालों ने अच्छी कमाई की।
दो दिन से ज्यादा चले प्रदर्शन के चलते बंधे की सड़क से लेकर लक्ष्मण मेला मैदान तक हर तरफ गंदगी नजर आ रही थी।