बदलने के बाद विकास कार्यों में अड़ंगेबाजी की गाज प्रमुख सचिव वित्त आनंद मिश्र पर गिराई। वर्ष 2014-15 का बजट तैयार कराने के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें पद से हटाकर प्रतीक्षा में डाल दिया है।
मिश्र के खिलाफ मंत्रियों से लेकर विधायकों तक की शिकायतें आम हो गई थीं। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मिश्र की छवि विकास कार्यों में अड़ंगेबाजी लगाने वाले अफसर के रूप में बन गई थी।
उन्हें साथी ब्यूरोक्रेट तक ‘कंजूस’ बताते रहे हैं। आईएएस वीक में उनको यह उपाधि वित्त विभाग में आने के बाद ही मिली।
नियमों को लेकर बहुत सख्त थे
एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि मिश्र किसी दबाव में नहीं आते थे और वित्तीय नियमों का सख्ती से पालन कराते थे।
यदि इस पद पर बैठा व्यक्ति भी कड़ी नजर नहीं रखेगा तो फिर वित्तीय अनियमितताओं पर कोई अंकुश नहीं रह जाएगा।
उनका यह रवैया सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों तक के प्रति समान रहा। इस नाते वह पिछले काफी समय से इनके निशाने पर थे।
मुख्मंत्री तक पहुंचने लगी थीं शिकायतें
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां ने गाजियाबाद हज हाउसके निर्माण में अड़ंगेबाजी का आरोप लगाकर मिश्र के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया था।
जानकार बताते हैं कि अन्य विभागों के मंत्रियों व विधायकों से जुड़े मामले छोड़ भी दें तो सिंचाई, लोक निर्माण तथा अल्पसंख्यक कल्याण व नगर विकास विभाग से जुड़े कई मामलों में मिश्र की ज्यादा लिखापढ़ी व अड़ंगेबाजी से स्थिति काफी गंभीर हो गई थी।
उनके बारे में कहा जाता है कि वह समस्या का समाधान सुझाने के बजाय उसमें अड़ंगा डालना पसंद करते थे।
विभिन्न विभागों से आने वाली सेवा संबंधी फाइलों का महीनों तक निस्तारण न होना भी उनके खिलाफ गया। आगंतुकों से मिलने व उनकी सुनने में दिलचस्पी न लेने की बड़ी शिकायत थी।
पिछले कुछ महीनों से उनकी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री व सपा मुखिया तक पहुंच रही थी।
शासन ने आम बजट तैयार होते ही उन्हें हटाकर जनता व जनप्रतिनिधियों को तवज्जो न देने की सजा सुना दी। प्रदेश कैबिनेट ने सुबह बजट के मसौदे को मंजूरी दी, दोपहर बाद उन्हें हटा दिया।