लखनऊ में जीत के बाद जश्न मनाते सपा कार्यकर्ता
- फोटो : amar ujala
इन नतीजों के बाद लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की संभावनाएं बढ़ गई हैं। पर, इसकी राह पूरी तरह निरापद नहीं है। लोकसभा की तीन और विधानसभा की एक सीट के उप चुनाव में जीत हासिल करने के बाद भी यह सवाल आज नहीं तो कल इस एकता की परीक्षा बनेगा कि बसपा या सपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों में कौन किसको नेता मानेगा।
यही नहीं, 2019 में राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का मुकाबला करने का दावा करने वाली कांग्रेस क्या उत्तर प्रदेश में महज कुछ सीटों पर ही चुनाव लड़कर संतोष कर लेगी। एक वक्त के लिए सभी पार्टियों के नेता परस्पर सहमत भी हो जाएं और संतोष भी कर लें तो क्या इनके अलग-अलग इलाकों में चुनाव लडऩे का सपना देख रहे लोग मान जाएंगे।
साफ है कि कैराना ने विपक्षी एकता की संभावनाओं की नींव को तो मजबूत कर दिया है लेकिन उस पर इमारत खड़ी करने की राह में अब भी तमाम चुनौतियां खड़ी हैं।