लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में इलाज-जांच के नाम पर बरती जा रही घोर लापरवाही का ताजा मामला देखिए। घुटने का लिगामेंट टूटने पर इलाज कराने आए मरीज को जांच रिपोर्ट में एड्स मरीज बना दिया गया।
इस एक गलत रिपोर्ट के कारण मरीज को बस दिल का दौरा नहीं पड़ा, लेकिन उसका अच्छा भला जीवन कुछ समय के लिए डांवाडोल हो गया। बीमारी केभय के अलावा उसके पारिवारिक जीवन में तनाव पैदा हो गया वो अलग।
बाद में केजीएमयू व निजी पैथोलॉजी से जांच में रिपोर्ट निगेटिव आने पर जब मरीज शिकायत लेकर पहुंचा तो बलरामपुर में डॉक्टर व स्टाफ ने अपनी गर्दन बचो के लिए कम्प्यूटर से सही प्रिंट निकालकर सही रिपोर्ट थमा दी।
काकोरी मोहान रोड के रहने वाले आलोक वर्मा (32) हादसे में घायल हो गए और लिगामेंट इंजरी हो गई। आलोग ने बलरामपुर अस्पताल में डॉ. सुनील यादव को ओपीडी में दिखाया।डॉ. सुनील ने वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. जीपी गुप्ता को रेफर कर दिया। डॉक्टर ने मरीज का ऑपरेशन करने से पहले एचआईवी समेत अन्य जांच कराकर आने को कहा।
पैथोलॉजी जांच में हो रहा है खिलवाड़
बलरामपुर से जारी रिपोर्ट
- फोटो : amar ujala
मरीज ने 18 मई को बलरामपुर अस्पताल के क्षेत्रीय निदान केंद्र में ब्लड का सैंपल दिया। अगले दिन रिपोर्ट देख डॉक्टर और मरीज दोनों चकरा गए। मरीज ने केजीएमयू और निजी पैथोलॉजी में जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई।
मरीज मामले की शिकायत लेकर पैथोलॉजी में गया तो वहां हड़कंप मच गया। पैथोलॉजिस्ट व निजी कंपनी के कर्मचारियों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए रिपोर्ट ठीक करके उसे एचआईवी निगेटिव की दोबारा रिपोर्ट थमाई। डॉक्टर ने मरीज को अस्पताल में भर्ती कर लिया है।
बलरामपुर अस्पताल में मरीजों की पैथोलॉजी जांच में खिलवाड़ हो रहा है। बिना पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर ही मरीजों को जांच रिपोर्ट थमाई जा रही है। मरीजों का कहना है सरकारी व निजी अस्पताल से जांच कराने पर दोनों में अंतर आ रहा है। पैथोलॉजी जांच का ठेका निजी कंपनी पीओसीटी को दिया गया है।
कंपनी ने अपनी मशीन लगाने के साथ जांच के लिए कर्मचारियों को लगा रखा है। सैंपल लेने से लेकर जांच करने तक काम पीओसीटी के पास है। वहीं अस्पतालों से मरीजों की होने वाली जांच रिपोर्ट बिना पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर के ही कंप्यूटर से प्रिंट निकालकर मरीजों को थमाई जा रही है।
कंपनी के प्रमुख अभय अग्रवाल का कहना है कि बलरामपुर अस्पताल में एचआईवी की जांच पीओसीटी नहीं करती है। एचआईवी की जांच के लिए वहां का स्टॉफ लगा है। कहा कि मरीजों को दी जाने वाली रिपोर्ट बेहतर जा रही है।
एक पल को लगा सब खत्म
केजीएमयू से जारी रिपोर्ट
- फोटो : amar ujala
बलरामपुर अस्पताल की लापरवाही से बिना जांच पड़ताल ही मरीज को एचआईवी पॉजीटीव की रिपोर्ट बिना पैथोलॉजिस्ट के दस्तख्त थमा दी गई। डॉक्टर ने मरीज की रिपोर्ट देखकर एचआईवी संक्रमित बताया तो उसे बड़ा आघात लगा।
आलोक ने बताया कि उसे तो एक पल के लिए लगा सब खत्म हो गया। उसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद परिवार भी तनाव में आ गया था। घरवाले भी उसे ताना मारकर कोसने लगे थे। दो पैथोलॉजी की रिपोर्ट सामान्य आने बाद मरीज ने राहत की सांस ली।
लिखित शिकायत करे मरीज
मरीज लिखित तौर पर शिकायत करें तो मामले की जांच कराकर लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। - स्वास्थ्य महानिदेशक, पद्यमाकर सिंह
कम्पयूटर ऑपरेटर ने मांगी माफी
निजी लैब से जारी रिपोर्ट
- फोटो : amar ujala
कम्प्यूटर ऑपरेटर की गलती, उसने माफी मांग ली
रिपोर्ट में कम्प्यूटर ऑपरेटर ने गलती से एचआईवी पॉजिटिव लिख दिया था। इस मामले में ऑपरेटर ने बाद में माफी भी मांगी है। - डॉ. राजीव लोचन,बलरामपुर अस्पताल निदेशक,
देखिए....एक चूक पड़ सकती है कितनी भारी, कौन होगा जिम्मेदार
जांच रिपोर्ट में लापरवाही किसी भी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है। या तो गलत रिपोर्ट गलत इलाज की ओर ले जाएगी या फिर मरीज यदि कमजोर दिल का हुआ तो बड़ी बीमारी का संकेत सदमे का कारण बन सकता है। जांच रिपोर्ट में गलती के कारण होने वाले नुकसान का जिम्मेदार कौन होगा?