थानों में इंस्पेक्टर व थानाध्यक्षों की तैनाती में पूर्व की तरह डीएम के लिखित अनुमोदन की अब जरूरत नहीं होगी। आईपीएस संवर्ग के असंतोष को देखते हुए गृह विभाग बैकफुट पर आ गया है। गृह विभाग ने 9 मई को जारी शासनादेश को वापस ले लिया है। प्रमुख सचिव गृह ने गुरुवार को इस संबंध में संशोधित शासनादेश जारी कर दिया है।
संशोधित शासनादेश में बसपा शासन में जारी आदेशों का हवाला दिया गया है, जिसमें थानों पर थानाध्यक्ष व निरीक्षकों की तैनाती के लिए पुलिस कप्तानों को डीएम से परामर्श कर आपसी सहमति के आधार पर आदेश जारी करने की व्यवस्था थी।
गौरतलब है कि प्रमुख सचिव गृह ने 9 मई को आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि जिलों में किसी भी थाने पर इंस्पेक्टर व थानेदारों की नियुक्ति से पहले डीएम का लिखित अनुमोदन जरूरी होगा। आदेश के बाद आईपीएस एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर की थी।
डीजीपी ओम प्रकाश सिंह खुद इस मामले में आगे आए और शासन में बात की। उन्होंने पुलिस रेगुलेशन एक्ट की धारा 6 और 524 के प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया था कि थानों पर तैनाती का आदेश डीएम और एसपी की आपसी सहमति से हो सकता है। इसके बाद गृह विभाग ने नौ मई के आदेश में संशोधन किया है।
केंद्रीय आईपीएस एसोसिएशन ने भी किया था विरोध
इस मामले में केंद्रीय आईपीएस एसोसिएशन ने भी विरोध किया था। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब बहस शुरू हो गई थी। फैसले के कुछ ही दिन बाद नोएडा के एसएसपी और डीएम में भी लेटरबाजी हुई थी। लेकिन अब इस मामले में सरकार के बैकफुट पर आने के बाद आईपीएस खेमा अपनी जीत मान रहा है।