लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड के मामले में एसआईटी दमकल के घटनास्थल पर देरी से पहुंचने के कारणों की भी जांच कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर उसे मौके पर पहुंचने में 40 मिनट क्यों लग गए? एसआईटी इसकी भी छानबीन कर रही है कि फायर ब्रिगेड के देर से पहुंचने के कारण तो आग विकराल नहीं हुई?
जांच में सामने आया है कि फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम के पास ऐसे उपकरण नहीं थे, जिनसे इमारत की दीवार काटी जा सके। धुआं निकालने और राहत कार्य शुरू करने के लिए टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। लपटों के कारण टीम अंदर प्रवेश नहीं कर पाई। पड़ोसी की छत से दीवार को हथौड़े से तोड़ने में भी काफी वक्त लगा। इस बीच आग पूरी इमारत में फैल गई और धुएं के कारण दम घुटने से 15 लोगों की मौत हो गई।
घटना से सबक लेकर समीक्षा रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इलाके की आबादी और फायर स्टेशनों की संख्या के आधार पर रिपोर्ट बनाई जा रही है। अलीगंज, महानगर, विकासनगर, गुडंबा, मड़ियांव, सैरपुर और महिंगवा समेत अन्य इलाकों में लाखों की आबादी रहती है, पर यहां कोई भी फायर स्टेशन नहीं है। अब दूरी और आबादी के हिसाब से उन इलाकों का सर्वे कर फायर स्टेशन बनाने पर विचार किया जा रहा है।
आरोपियों के बयान दर्ज करेगी एसआईटी
अग्निकांड मामले में अलीगंज पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने सभी को जेल भेज दिया था। एसआईटी अब चारों से पूछताछ की तैयार कर रही है। सभी के बयान दर्ज करने के बाद एसआईटी शासन को रिपोर्ट सौंपेगी। एसआईटी ने बृहस्पतिवार को भवन के आसपास रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की थी। एसआईटी स्थानीय लोगों के बयान को जांच में शामिल करेगी।