निलंबित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने शनिवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन को पत्र लिखकर अपने निलंबन और सतर्कता जांच के संबंध में कई सवाल उठाए हैं।
ठाकुर ने कहा कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की धमकी के बाद उन्हें निलंबित किए जाने पर 13 जुलाई 2015 को दिए गए आरोप पत्र में डीजीपी जगमोहन यादव का उसी तारीख का एक पत्र था।
इसमें एसपी सिंह, उप सचिव सतर्कता विभाग के नौ मार्च 2015 के पत्र द्वारा निदेशक, सतर्कता को गोपनीय जांच कर स्पष्ट सिफारिश देने की बात कही गई थी।
इस पत्र में अमिताभ ठाकुर के आईजी सिविल डिफेंस रहते हुए गोपनीय जांच निष्पक्ष रूप से नहीं हो पाने के आधार पर निलंबन की सिफारिश की गई थी।
ठाकुर ने कहा कि पिछले दिनों समाचारपत्रों में लोकायुक्त के हवाले से प्रकाशित खबरों के अनुसार उनके खिलाफ कभी गोपनीय जांच नहीं हुई, फिर डीजीपी ने इसका उल्लेख क्यों किया?
उन्होंने तीन साल से लंबित मामले में अचानक नौ अगस्त को खुली जांच कराने के निर्णय लेने के औचित्य पर भी सवाल उठाया है।