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अंबेडकरनगर: अपने गढ़ में प्रचार करने क्यों नहीं गईं मायावती? बसपा के सिटिंग सांसद भाजपा से लड़ रहे हैं चुनाव

Thu, 23 May 2024 10:47 AM IST
रोहित मिश्र अश्विनी मिश्र, अमर उजाला, अंबेडकरनगर

सार

Ambedkarnagar: अंबेडकरनगर बसपा का गढ़ माना जाता रहा है। 2019 की मोदी लहर में भी यह सीट बसपा ने जीती थी। बावजूद इसके इस बार मायावती वहां चुनाव प्रचार करने तक नहीं गईं। 
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बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राजनीति का भी रिश्ता अजब है। कभी जुड़ाव तो कभी दुराव। अंबेडकरनगर व बसपा के संबंधों में भी कुछ ऐसा ही है। करीब तीन दशक की राजनीति में यह पहला मौका है जब बसपा प्रमुख मायावती पार्टी के गढ़ रहे अंबेडकरनगर से अभी दूरी बनाई हुई हैं। चुनाव प्रचार करने भी नहीं पहुंचीं। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दो सभाएं अपेक्षित थीं, लेकिन आचार संहिता के फेर में उनका भी दौरा नहीं हो पाया। प्रचार खत्म होने के अंतिम दिन 23 मई को गृहमंत्री अमित शाह की सभा हो रही है। 

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जिले की राजनीति बसपा के इर्द गिर्द घूमती आई है। वर्ष 1995 में बसपा प्रमुख मायावती ने ही मुख्यमंत्री के तौर पर अंबेडकरनगर नाम से नए जनपद की सौगात दी थी। बसपा उसके बाद लोकसभा और विधानसभा चुनावों में धमाकेदार प्रदर्शन करती रही। मायावती खुद यहां के चुनाव प्रचार की कमान पूरी मजबूती से संभालती रहीं। शुरुआती दौर में तो यहां दो-दो रैली और जनसभा भी होती थी। इस बार भी उम्मीद थी कि वह अंबेडकरनगर में जोरदार प्रचार करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।  

बसपा में काफी कुछ बदला
इस चुनाव में बसपा के लिए काफी कुछ बदल गया है। पिछले पांच वर्ष में पार्टी के कई बड़े नेता सपा और भाजपा में जा चुके हैं। यहां टिकट को लेकर खींचतान भी मची रही। प्रचार के नाम पर राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के पहले मायावती के भतीजे आकाश आनंद ही यहां एक रैली कर सके। पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्र तक का दौरा यहां नहीं लगा।

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