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उद्योगों का पहिया रुकने नहीं देंगे, अमर उजाला ‘वेबिनार’ में मंत्री सतीश महाना ने दिया भरोसा

Sat, 06 Jun 2020 12:16 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सतीश महाना - फोटो : amar ujala
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औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा कि प्रदेश सरकार ने कोरोना काल की चुनौती को बड़े अवसर के रूप में लिया है। सरकार उद्योगों और उद्यमियों के साथ हर कदम पर खड़ी है। उनकी हर समस्या का समाधान होगा। हम उद्योगों का पहिया रुकने नहीं देंगे। इस कठिन परिस्थिति से आगे निकलकर जाएंगे।
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महाना ने कहा कि तमाम परेशानियों और चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ते रहना मनुष्य का स्वभाव है। जिंदगी की साइकिल और उद्योगों का पहिया रुकना नहीं चाहिए। निवेश बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसका असर यह हुआ है कि कई बड़ी निवेशक कंपनियों ने यूपी में निवेश की रुचि दिखाई है।

महाना शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ की ओर से ‘कोरोना काल में उद्योगों की चुनौतियां’ विषय पर आयोजित वेबिनार में विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के सवालों व सुझावों का जवाब दे रहे थे। वेबिनार में सीआईआई, आईआईए, एसोचैम, पीएचडी चैंबर ऑफ काॅमर्स व डिक्की के पदाधिकारी व प्रतिनिधि शामिल हुए।
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उद्यमियों के बकाया भुगतान में मदद करेंगे
उद्यमियों ने सरकारी व अर्धसरकारी संस्थाओं में उद्यमियों के बकाया भुगतान का मामला उठाया। महाना ने आश्वस्त किया कि सरकारी संस्थाओं में बकाया का भुगतान कराने में वे मदद करेंगे। इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जैसे जैसे बाजार खुलेगा तो डिमांड भी बढ़ेगी। बाजार में पैसा आएगा वैसे-वैसे उद्योग-धंधे फिर उठने लगेंगे।

मंत्री सतीश महाना - फोटो : amar ujala
कोरोना काल में उद्योगों की चुनौतियों पर औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा है कि सरकार हर तरह से उद्योगों के साथ है। इंडस्ट्री के सर्वाइवल और रिवाइवल से लेकर प्रगति तक हर स्तर पर मदद के लिए खड़ी है। उन्होंने कहा कि उद्योग और श्रमिक एक-दूसरे के पूरक हैं। ऐसे में सरकार दोनों के हितों पर पूरा ध्यान दे रही है।

उन्होंने बताया कि उद्योगों को रफ्तार देने के लिए सरकार ने सीमा से अधिक भूमि खरीदने की समस्या का समाधान कर दिया है। जमीन की सीमा पर नया एक्ट लाए हैं। 25 एकड़ तक भूमि खरीदने की अनुमति डीएम, 50 एकड़ तक मंडलायुक्त और उससे अधिक भूमि की जरूरत पर ही राज्य सरकार की मंजूरी लेनी  होगी। इससे निवेशक तेजी से उद्योग स्थापित कर पाएंगे।

महाना शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ की ओर से ‘कोरोना काल में उद्योगों की चुनौतियां’ विषय पर आयोजित वेबिनार में विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब दे रहे थे। महाना ने कहा कि पिछले दिनों कोटेक इंस्टीट्यूशन सिक्योरिटी के प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक हुई।

यह संस्था देश और विदेशों में बड़ी-बड़ी कंपनियों को फाइनेंस करती है। इसका अच्छा फीडबैक मिला। कई विदेशी कंपनियां यूपी में निवेश करना चाहती हंै। यूपी में अपने प्लांट लगाना चाहती हैं। उन्होंने श्रमिकों की कमी, बिजली बिल भुगतान, बैंकों से ऋण मिलने में मुश्किल व बकाया भुगतान से जुड़े उद्यमियों के तमाम सवालों के विस्तार से जवाब दिए। उन्होंने उद्यमियों के कई महत्वपूर्ण सुझावों पर विचार का भी आश्वासन दिया।
 

मेक इन यूपी फॉर वर्ल्ड की ओर बढ़ रहे

मंत्री सतीश महाना - फोटो : amar ujala
महाना ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के संदेश के तहत प्रदेश में स्वदेशी को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब हम मेक इन इंडिया फॉर वर्ल्ड और मेक इन यूपी फॉर वर्ल्ड की ओर बढ़ रहे हैं। महाना ने कहा कि जब योगी सरकार आई थी, उस समय सैमसंग का नोएडा में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का मामला अटका हुआ था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मैंने प्रयास कर उस प्लांट को शुरू कराया। आज वहां 12 करोड़ मोबाइल बनते हैं, जो पूरी दुनिया में बेचे जाते हैं। हमारी सरकार आने के बाद यूपी में आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स की कई राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगे हैं, जहां से पूरे विश्व में उत्पाद भेजे जाते हैं। 

चीन से हटने वाले निवेशकों पर नजर, हेल्प डेस्क स्थापित 
महाना ने कहा कि सरकार ने चीन से निवेशकों के हटने पर भी ध्यान दिया है और यूएस, कोरिया, जापान सहित अन्य देशों के निवेशकों के लिए हेल्प डेस्क स्थापित की है। वरिष्ठ अधिकारी निवेशकों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस पहल की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं।

हर फैक्टरी को स्किल्ड मैन पावर मिलेंगे
उद्यमियों ने श्रमिकों की कमी का मुद्दा उठाया तो महाना ने कहा कि स्किल्ड मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए गत दिनों चार औद्योगिक संगठनों के साथ एमओयू किया गया है। हर श्रमिक की स्किल मैपिंग की जा रही है। जो भी फैक्टरी मैनपावर चाहेगी, उसकी आवश्यकता के अनुसार स्किल वाले श्रमिक उसे उपलब्ध कराए जाएंगे।

एमएसएमई इकाइयों को मिलने लगे ऑर्डर

- फोटो : amar ujala
महाना ने कहा कि महाराष्ट्र, पंजाब सहित कई प्रदेशों में स्किल्ड लेबर की कमी हो गई है। वहां जो उद्यम स्थापित थे, उनमें उत्पादन प्रभावित हो रहा है। वहां जो प्रोडक्ट बनना बंद हो गए हैं, उनके लिए अब यूपी के बड़े उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों को ऑर्डर मिलने लगे हैं।

रियल एस्टेट को मजबूती जरूरी
रियल एस्टेट क्षेत्र को मजबूती मिलनी जरूरी है। रियल एस्टेट के बढ़ने से पूरी अर्थव्यवस्था का चक्र घूमता है। ऐसे में इसे बढ़ना चाहिए। इसलिए इसमें अब उद्यमियों को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

पीएफ को लेकर अब कोई अड़चन नहीं
उद्योगपतियों ने कर्मचारियों के पीएफ भुगतान संबंधी सवाल उठाए। महाना ने बताया कि पीएफ को लेकर केंद्र सरकार ने अगस्त महीने तक के लिए आदेश जारी कर दिया है। उद्यमियों को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
बैंकों से जुड़ी समस्याओं पर केंद्रीय मंत्री से की है बात

बैंकों से जुड़ी समस्याओं पर केंद्रीय मंत्री से की है बात
महाना ने बताया कि बैंकों की ओर से आ रही समस्याओं पर उन्होंने केंद्रीय वित राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर से बात की है। इसके बाद कुछ हद तक सुधार भी हुआ है। यदि फिर भी कहीं समस्या है तो उसका समाधान कराया जाएगा।
बिजली के फिक्स्ड चार्ज पर पैरवी करेंगे
उद्यमियों ने लॉकडाउन के दौरान फैक्टरी बंदी अवधि का बिजली बिल माफ किए जाने का मामला उठाया। महाना ने कहा कि उद्यमियों, व्यापारियों और दुकानदारों के बिजली के बिल में फिक्स्डचार्ज माफ कराने के लिए वे सरकार से पुरजोर पैरवी करेंगे।

श्रम सुधारों पर केंद्र के फैसले का इंतजार
श्रम सुधारों से संबंधित सवालों पर मंत्री ने कहा कि प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। अनुमति मिलने तक इंतजार करना पड़ेगा। प्रदेश केंद्र को ओवर-रूल नहीं कर सकता है। उन्होंने फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्वीकृति में आने वाली कठिनाई दूर कराने का आश्वासन दिया।

मैन्युफैक्चरिंग का टॉप स्टैंडर्ड प्राप्त करना होगा 

केरॉन चोपड़ा, पूर्व अध्यक्ष सीआईआई, यूपी काउंसिल  - फोटो : amar ujala
लॉकडाउन के दौरान सरकार, समाज और उद्यमियों ने प्रवासी श्रमिकों की चिंता की है। सरकार ने आर्थिक मदद से लेकर गांव पहुंचाने तक हर संभव प्रयास किया। समाज और उद्यमियों ने श्रमिकों को भोजन पैकेट, राशन, नकद राशि, कपड़े और जूते-चप्पल तक मुहैया कराया। - सतीश महाना

दुनिया की टॉप 17 देशों की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार वहां के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। हमारे परिचित उद्यमी अब चीन छोड़कर नए स्थान की तलाश में हैं। उनके लिए यूपी से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। हमारी औद्योगिक नीति किसी भी अन्य प्रदेश से बेहतर है। इसका हम एमएसएमई में कैसे उपयोग कर सकते हैं इस पर फोकस करना होगा। वापस लौटे श्रमिक के कौशल व क्षमताओं का हमें यहीं पर उपयोग कर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना होगा। हमें मैन्युफैक्चरिंग का टॉप स्टैंडर्ड 4.0 प्राप्त करना ही होगा। - केरॉन चोपड़ा, पूर्व अध्यक्ष सीआईआई, यूपी काउंसिल 
 

आवश्यकता के अनुसार लेबर उपलब्ध हों 

पंकज कुमार, प्रेसीडेंट, आईआईए, विजय आचार्य, प्रेसीडेंट, एसौचेम, यूपी  - फोटो : amar ujala
संस्थानों में फंसे बकाये का प्राथमिकता पर हो भुगतान
उद्योगों को रफ्तार देने के लिए फिलहाल सबसे बड़ी समस्या नकदी व श्रमिकों की कमी है। बाजार, सरकार व अर्धसरकारी महकमों में पैसे अटके पड़े हैं। खरीदार के पास भी पैसा नहीं है। सरकारी व अर्धसरकारी महकमों में फंसी राशि का प्राथमिकता पर भुगतान हो तो बड़ी राहत मिल सकती है। उद्यमियों का काफी पैसा टेंडर की अमानत राशि में फंसा हुआ है, उसे रिलीज कराना चाहिए। कुछ प्रदेशों की सीमाएं सील हैं। परिवहन के पर्याप्त साधन न होने से कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पाद को दूसरे प्रदेशों में भेजने में समस्या आ रही है। -पंकज कुमार, प्रेसीडेंट, आईआईए

आवश्यकता के अनुसार लेबर उपलब्ध हों
प्रदेश में अब श्रमिकों की कमी नहीं है। ऐसा सिस्टम विकसित होना चाहिए कि उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार स्किल्ड लेबर तुरंत उपलब्ध हों। फूड प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट, लखनऊ व रायबरेली में अड़चन आ रही है। उन्हें जल्द मंजूरी मिले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और औद्योगिक विकास मंत्री के नेतृत्व में उद्यमियों को काफी राहत मिली है। - विजय आचार्य, प्रेसीडेंट, एसौचेम, यूपी 
 

बिजली का फिक्सड चार्ज माफ हो 

मनमोहन अग्रवाल, महासचिव आईआईए, मनीष खेमका, को-चेयरमैन, यूपी चैप्टर पीएचडी सीसीआई - फोटो : amar ujala
एक फैक्ट्री-दो कानून से बढ़ेगा इंस्पेक्टर राज 
श्रम सुधार के नए नियमों से उद्योगों की मुश्किलें बढ़ेंगी। पुराने उद्योगों में नए कर्मियों को लेकर नया कानून और पुराने को लेकर मौजूदा कानून, इससे इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा। एक ही फैक्ट्री में दो कानून लागू होंगे, जिसके अनुपालन में समस्याएं बढे़ंगी। -मनमोहन अग्रवाल, महासचिव आईआईए

बिजली का फिक्सड चार्ज माफ हो
70 दिन तक उद्योग-धंधे बंद रहने से उद्यमियों व व्यापारियों की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ा है। मार्च, अप्रैल, मई और जून के बिजली के बिल में फिक्सड चार्ज माफ करना चाहिए, ताकि उद्यमियों को कुछ राहत मिले। सरकार ने मनरेगा में एक लाख करोड़ का बजट रखा है। इस कारण भी उद्योगों को श्रमिक मिलने में परेशानी हो रही है। ऐसा कोई सिस्टम तैयार होना चाहिए कि मनरेगा के लेबर को उद्योगों में ही रोजगार मिले। - मनीष खेमका, को-चेयरमैन, यूपी चैप्टर पीएचडी सीसीआई

 

उद्योगों से जुड़े पुराने कानूनों में संशोधन होना चाहिए

योगेश सेठिया, एसोचैम, विनोद शर्मा, सीआईआई  - फोटो : amar ujala
जीएसटी रिटर्न फाइलिंग पर ब्याज खत्म हो 
रेड व औरेंज जोन की फैक्ट्रियों को श्रमिकों को बस लाने व भेजने का आदेश है। पर जिन श्रमिकों के पास अपना साधन है उन्हें छूट होनी चाहिए। जिनके पास साधन नहीं हैं, रात में आना-जाना है, उनके बारे में कोई दिक्कत नहीं है। इसी तरह मार्च-अप्रैल की जीएसटी रिटर्न फाइलिंग के लिए ड्यू डेट नहीं बढ़ाया गया। केवल 15 दिन की छूट दी गई है। यदि इसके बाद हुआ तो 9 प्रतिशत ब्याज लगा रहे हैं। मार्च व अप्रैल के लिए ब्याज खत्म करना चाहिए।  - योगेश सेठिया, एसोचैम

श्रमिकों को अपने प्रदेश में काम करने को प्रोत्साहन दे सरकार
श्रम कानून में संशोधन की पहल अच्छी है, लेकिन फिर सरकारी विभाग वापस सख्ती की ओर से बढ़ रहे हैं। लेबर नहीं मिल रहे हैं, ऐसे में यदि श्रमिक स्वयं 8 की जगह 12 घंटे काम करना चाहे तो उसकी मंजूरी देनी चाहिए। अपने प्रदेश में कार्य कर रहे श्रमिकों के लिए सरकार की तरफ से 6 प्रतिशत पीएफ की घोषणा करनी चाहिए। उद्योगों से जुड़े पुराने कानूनों में संशोधन होना चाहिए जो अब व्यावहारिक नहीं हैं। मसलन, 250 से ज्यादा वर्कर हों तो एक एंबुलेंस, इसी तरह डाॅक्टरों की अनिवार्यता। अब जब इंडस्ट्री के अगल-बगल कई अस्पताल हैं तो इस शर्त की क्या जरूरत? चीन की तरह यूपी में भी एम्पलाइज हॉस्टल की व्यवस्था लागू होनी चाहिए। -विनोद शर्मा, सीआईआई 
 
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नई एक्सपोर्ट पॉलिसी बनानी होगी

आरके पोरवाल, एसोचेम, सचिन अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष सीआईआई यूपी  - फोटो : amar ujala
रियल एस्टेट को मजबूत करना होगा
रियल एस्टेट अकेले 30-40 उद्योगों को जोड़ता है। दुर्भाग्य से पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट में मंदी के कारण इससे जुड़े उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं। सरकार को इस सेक्टर को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा। बैंक छोटी-छोटी औपचारिकताओं की कमी के कारण व्यापारियों को ऋण नहीं दे रहे हैं। इसका समाधान होना चाहिए। व्यापारियों के टैक्स व व्यापार से जुड़े मामले अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित है। इनका समयबद्ध निस्तारण होना चाहिए।  -आरके पोरवाल, एसोचेम 

नई एक्सपोर्ट पॉलिसी बनानी होगी

मेक इन इंडिया फॉर वर्ल्ड के साथ एक्सपोर्ट आउट ऑफ यूपी और एक्सपोर्ट आउट ऑफ इंडिया पर फोकस करना होगा। निर्यात बढ़ाने के लिए प्रदेश को अपनी एक नीति लानी होगी। नई परिस्थितियों में नई नीति की जरूरत है। एक्सपोर्ट बढ़ने से ही व्यापार व उद्योगों को मजबूती मिलेगी। सरकार ने लेबर एक्ट में संशोधन तो किया है लेकिन उसका स्पष्टीकरण नहीं किया है कि पुराने व नए उद्यमों पर किस तरह लागू होगा। 70 दिन के बाद उद्योग अभी शुरू हुए हैं, लेकिन सरकारी विभागों ने अभी से टॉर्चर शुरू कर दिया है। - सचिन अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष सीआईआई यूपी 
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