फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला संवाद: योगीराज अरुण बोले- दिवाली की रात मुझे राम का चेहरा दिखा, जो दीपों की आभा लिए हुए था

Mon, 26 Feb 2024 11:50 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला टीम डिजिटल, लखनऊ

सार

अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का पहला सत्र राम मंदिर से राष्ट्र मंदिर विषय पर केंद्रित रहा। इस सेशन में राज्यसभा सांसद डा सुधांशु त्रिवेदी, रामलला की प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज और आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण मौजूद रहे।
विज्ञापन
Amar Ujala Samvad - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का पहला सत्र राम मंदिर से राष्ट्र मंदिर विषय पर केंद्रित रहा। इस सेशन में राज्यसभा सांसद डा सुधांशु त्रिवेदी, रामलला की प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज और आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण मौजूद रहे। अरुण योगीराज ने कहा कि इस मूर्ति का निर्माण जून से शुरू हुआ था। इसके बाद जेहन में सिर्फ राम की प्रतिमा और छवि थी। योगीराज ने कहा कि हमने 22 जनवरी को 500 साल का सपना को पूरा होते देखा। 
विज्ञापन


आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि अयोध्या ने बहुत आंसू बहाएं हैं। बधाई इस बात की अयोध्या ने अपने आप को धन्य कर लिया है। राम ने उन आंसुओं को तीर्थ में परिवर्तित कर दिया है। आचार्य नंदिनी शरण ने कहा कि राम के आगमन से अयोध्या में उत्सव नहीं है। मैं देश के जिस कोने में जा रहा हूं वहां ये उत्सव मनाया जा रहा है। 

राज्यसभा सांसद सुंधाशु त्रिवेदी ने कहा कि जब हम बच्चे थे तो हम एक नारा सुन रहे थे कि सौगंध राम की खाते हैं मंदिर वही बनाएंगे। यह नारा हम बचपन से सुन रहे थे जब यह पूरा हुआ तो खुशी की कोई सीमा नहीं रही। 
विज्ञापन

राम की आंखे कैसे तराशी

बालक राम की वह आंखें कैसे तराशी इस सवाल के जवाब में योगीराज ने कहा कि मैंने पत्थर के साथ इतना समय बिताया कि मैं पत्थर से बात कर लेता हूं। नेत्र तराशने से पहले सरयू नदी में स्नान करके हनुमान गढ़ी में दर्शन करना है। मैंने बहुत सारी आंखे बनाई हैं लेकिन उस समय मैं ब्लैंक हो गया था। मैंने राम से ही निवेदन किया कि आप जैसी आंखें चाहते हैं वैसी आंखें बनवा लीजिए। मैं उन आंखों को देश के साथ कनेक्ट करना चाहता था। यह भगवान की कृपा है कि वह नेत्र सबको अच्छे लग रहे हैं। 

राम मंदिर कोई इमारत नहीं थी

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राम मंदिर कोई इमारत नहीं है। यह हमारी सांस्कृति यात्रा है। यह यात्रा एक वैज्ञानिक है। राम मंदिर से जुड़ी जितनी भी घटनाएं हैं उनकी तारीखों का एक वैज्ञानिक महत्व है। इसका एक सामाजिक और राजनीतिक महत्व है। इसका एक अर्थशास्त्री महत्व है। राम कालचक्र की पूरी गति पूरी करके आए हैं। अपने मंदिर में आने से पहले वह लाखों लोगों को घर और शौचायल देकर आए हैं।

सरयू का एक नाम नेत्रजा है। वे भगवान के नेत्रों से प्रकट हुई हैं।

Amar Ujala Samvad - फोटो : अमर उजाला
आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि हमारी कई पीढ़ियां बीत गईं, लेकिन उन्हें यह अवसर नहीं मिल पाया था। सरयू का एक नाम नेत्रजा है। वे भगवान के नेत्रों से प्रकट हुई हैं। परमात्मा की कृपालता ही सरयू के रूप में प्रवाहित हुई है। अयोध्या ने कई बार आंसू बहाए हैं। 22 जनवरी इकलौती तारीख नहीं है। रामलला के दर्शन कर और आंसू बहाकर अयोध्या ने खुद को धन्य कर दिया है। आंसुओं ने इस अयोध्या को तीर्थ में परिवर्तित कर दिया है। ईश्वर रचना नहीं है। जगत रचना है। रचा जाता है, नष्ट हो जाता है। ईश्वर सार्वभौम सत्ता है, कभी व्यक्त, कभी अव्यक्त। त्रेता में भगवान ने दशरथनंदन के रूप में अवतार लिया था। कलयुग में रामलला ने फिर से अवतार लिया है और यह अर्चावतार है। यह मनोरथ अवतार है।

उन्होंने कहा कि 22 जनवरी के बाद निरंतर यात्राएं करनी पड़ रही हैं। देश श्रीराम से इस तरह जुड़ा हुआ है, यह पहले अनुभव नहीं हुआ। अभी राजस्थान गया था। वहां लोगों ने कहा कि रामलला अयोध्या में ही नहीं आए, हमारे यहां भी आए। राजा राम लौटकर जब अयोध्या आए और भरत ने जब राज्य उन्हें लौटाया तो कहा कि मां की जिद पर आपने राज्य लौटा दिया था। अब अवसर है कि मैं आपको यह राज्य लौटा दूं। जब तक नक्षत्र मंडल विद्यमान रहें, तब तक आप इस लोक के शासक होकर विद्यमान रहें। भरत की प्रतिज्ञा कैसे व्यर्थ हो सकती थी। श्रीराम ने उस प्रतिज्ञा को चरितार्थ करने के लिए फिर से अवतार लिया है।
विज्ञापन

पांच वर्ष के बालक के साथ राम भी चाहिए था

योगीराज अरुण ने कहा कि हमें पांच साल के बालक का रूप भी देना था और राम की गंभीरता भी लेकर आनी थी। इसके लिए मैंने बच्चों के साथ बहुत समय बिताया है। ताकि मैं समझ सकूं कि पांच साल का बच्चा आखिर होता कैसा है। यह पहली बार था कि मैं इसको लेकर नर्वस था। दीवाली की रात मैं अयोध्या में था। उसी रात मुझे दीपों की रोशनी में राम का चेहरा मिला। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें