मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने परीक्षा के समय तनाव खत्म करने के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि नंबर ही सबकुछ नहीं होता। लेकिन अध्यात्म हमें सिखाता है कि सब कुछ जैसा कुछ होता ही नहीं है। सच सिर्फ ईश्वर ही है। बाकी सब चीजें बनती-बिगड़ती रहती हैं।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के दूसरे दिन 'सार्थक जीवन की बात' विषय वाले सत्र में मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने बात की। इस दौरान उन्होंने पूजा-पाठ से लेकर कई मुद्दों पर खुलकर विचार रखे। मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने परीक्षा के समय तनाव खत्म करने के टिप्स दिए। जया किशोरी ने जीवन का असली मतलब समझाया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ बुढ़ापे के लिए नहीं है। यह जवानी के दिनों के लिए है। अध्यात्म और पूजा युवाओं के लिए है। ताकि वह जीवन का असली मतलब समझ सकें। होता इसका उल्टा है। जब हम बुढ़ापे में होते हैं तब पूजा करना शुरू करते हैं। अपनी अज्ञानताओं के लिए भगवान से माफी मांगते हैं। यदि वही लोग युवा दौर में पूजा-पाठ का सहारा ले लें तो उनसे गलती ही ना हो।
जया किशोरी ने कहा कि हर व्यक्ति जिंदगी में कुछ न कुछ कर लेता है। अपने बच्चे को किसी से कम्पेयर मत करिए। जिसमें वह बेहतर है उसे और तैयार करिए। जिसमें रुचि नहीं है, उससे वह मत कराए। बच्चों की रुचि के अनुसार उनका करियर चुने। बच्चों को गलत काम की सीख मत दीजिए। जया किशोरी ने कहा कि काम वह करना चाहिए जिसे करके नींद अच्छी आए। अपने बच्चों को ऐसी सीख दे दीजिए। कोई भी जीवन में भूखा नहीं मरता है।
विज्ञापन
क्या जया किशोरी को भी गुस्सा आता है?
इस सवाल के जवाब पर जया किशोरी ने कहा कि मैं तो भगवान के पास ही जाती हूं। मुझे उससे ज्यादा सुकून कहीं नहीं मिलता। मेरे दिमाग में जब बहुत सारी चीजें चल रही होती हैं तो मैं आंख बंद करके भजन सुनती हूं। फिर मुझे जवाब मिल जाता है कि भगवान आज तक संभालते आए हैं, आगे भी संभाल लेंगे। गुस्सा मुझे मेरी मर्जी से आता है।
मैंने अपनी जिंदगी का रिमोट कंट्रोल दूसरों को नहीं दिया कि कोई आए गुस्सा दिलाकर चला जाए। गुस्से में व्यक्ति वही बात करता है, जो वह साधारण तौर पर नहीं बोलता। आप वही बोलते हैं, जो मन में चल रहा है। मैं गुस्सा होती हूं, रोती भी हूं, उदास होती हूं, लेकिन सब अपनी मर्जी से। यह कंट्रोल आपके पास होना चाहिए। कोई भी आपको रोबोट बनाने का काम नहीं कर रहा।
गुस्से या उदासी में मैं शांत हो जाती हूं। कुछ घंटे के लिए रुक जाती हूं। आसपास के लोगों से कह देती हूं कि मुझे छेड़ो मत। जब आप क्रोधित होते हैं, तब आपका लहजा, शब्द सब खराब हो जाते हैं। तब मुंह से निकली बात याद रह जाती है। कोई ऐसा न करे तो पहला कदम यह है कि मैं भी वह न करूं।
बहुत गुस्सा आए तो क्या करें?
इस पर जया किशोरी ने कहा कि शांत हो जाइए। तुरंत प्रतिक्रिया मत दीजिए। बाद में बात करें।
युवा तय नहीं कर पाते कि क्या करना है। ऐसे में फोकस कैसे करें?
जया किशोरी ने कहा कि समय लीजिए। इंस्टेंट दुनिया में जीना छोड़िए। हर चीज दो मिनट में नहीं होती। समय लीजिए, फिर फैसला कीजिए।
लोग जोखिम लेने में डरते हैं तो क्या करें?
जया किशोरी ने कहा कि आप जोखिम लेने में डर रहे हैं यानी आप उस काम से प्यार नहीं कर रहे। फायदे आपको हमेशा नहीं मिलेंगे। नुकसान भी होगा, लेकिन काम से प्यार होगा तो आप कहेंगे कि नुकसान भी झेल लेंगे।
जो लोग बहुत भावुक हैं, चीजों-लोगों से दिल लगा लेते हैं, वो क्या करें?
जया किशोरी ने कहा कि मैं भी छोटी-छोटी बातों पर कभी-कभी रो देती हूं। इसमें दिक्कत नहीं है। यह लंबा नहीं खींचना चाहिए। एक-एक हफ्ता आप एक ही बात पर नहीं रो सकते। इमोशनल होना अच्छी बात है, लेकिन उसे अपनी कमजोरी नहीं बनाएं। डिटैच होना सीखिए।
क्या आने वाले वक्त में हम आपको नई भूमिका में देखेंगे?
जया किशोरी ने कहा कि बिल्कुल। मेरा काम है कि भगवान की अच्छी बातें आप तक पहुंचे। कथा, भजन या मोटिवेशन के जरिए मैं यह सब करूंगी। आप मुझे कई भूमिकाओं में आगे देख सकते हैं। मैं भौतिकवादी जिंदगी जी रही हूं और मैं इस बात से इनकार नहीं कर सकती। मैं लोगों से नहीं कहती कि पैसे मत कमाओ। आपने ग्रहस्थ जीवन चुना है तो आपका काम है पैसा कमाना।
परेशानियों में मजबूत लोग भी तनाव में आ जाते हैं। संतुलन कैसे बने?
इस सवाल पर जया किशोरी ने कहा कि शास्त्र पढ़िए। आपके जीवन में बड़ा बदलाव आ जाएगा। शास्त्र आपको पूजा-पाठ नहीं सिखा रहे। शास्त्र आपको जीवन जीना सिखा रहे हैं। बाहरी युद्ध से तो अर्जुन डरा ही नहीं। वह मन के युद्ध में नहीं जीत पा रहा था, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें रास्ता दिखाया। वे युद्ध लड़ रहे थे, लेकिन भगवान उन्हें सात्विक, राजसिक, तामसिक के मायने सिखा रहे थे, क्योंकि वे अंदर से उन्हें मजबूत होना सिखा रहे थे। कोरोना में भी डॉक्टरों ने कहा कि इम्युनिटी मजबूत है तो बचे रहेंगे। अंदरूनी ताकत और मानसिक ताकत होनी चाहिए, यही श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सिखाया, लेकिन इंसान की रोने की आदत हो गई है। उसके रोने खत्म नहीं होते। जब बीमार होते हैं तो हम डॉक्टर के पास जाते हैं। जब मानसिक दिक्कतें आती हैं तो हम रोने लग जाते हैं। आप दुखी गाने ही चलाओगे।
आपके श्रीकृष्ण को ज्यादा मानती हैं या श्रीराम को?
इस पर जया किशोरी ने कहा कि कृष्ण ही राम हैं और राम ही कृष्ण हैं। श्रीराम आपको सिखाते हैं कि मर्यादा में रहते कैसे हैं और श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि मर्यादा में रखते कैसे हैं। दोनों सिखाते हैं कि बदलाव प्रकृति का नियम है। समय बदलेगा तो हमें भी बदलाव करना होगा। जैसे-जैसे समय बदलता गया तो ईश्वर ने भी 24 अवतार लिए। आपको किस अवतार से कब सीख लेनी है, यह समझिए।