लखनऊ। 200 करोड़ रुपये के म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी कर बड़े ताम-झाम के साथ शुरू की गई नगर निगम की पहली मल्टीस्टोरी आवासीय योजना अहाना ग्रींस अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। यहां के आवंटी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जबकि नगर निगम के अधिकारी अपनी ही घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
बीती 10 अक्टूबर को नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कॉलोनी का दौरा कर 7 से 10 दिनों के भीतर सभी समस्याओं के निस्तारण का भरोसा दिया था, लेकिन पांच महीने बाद भी स्थिति नहीं बदली। बृहस्पतिवार को आवंटी हेमंत सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर नाराजगी जताई। आवंटियों का कहना है कि 50 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी वे यहां खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
प्रमुख समस्याएं जो बनी हैं मुसीबत
लिफ्ट और पावर बैकअप :
परिसर में दो बड़े जनरेटर लगे हैं, लेकिन उनका कनेक्शन लिफ्ट से नहीं जोड़ा गया है। बिजली कटते ही लिफ्ट बीच में फंस जाती है।
अधूरी पार्किंग और जल निकासी :
पार्किंग का आवंटन अब तक अधूरा है और ड्रेनेज सिस्टम सही न होने से जलभराव की समस्या बनी रहती है।
सुरक्षा और रखरखाव : टावरों के ऊपर विमानों के लिए जरूरी अलार्म लाइटें नहीं लगी हैं। पार्कों में अंधेरा रहता है और सफाई की व्यवस्था भी बेपटरी है।
निर्माण में खामियां : फ्लैटों की दीवारों में सीलन आ रही है और टावर एम-3 व एम-4 में अब भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
आरडब्ल्यूए के गठन पर भी चुप्पी : रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के गठन को लेकर अब तक कोई एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार नहीं की गई है, जिससे रखरखाव की जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है।
Iअहाना ग्रींस में जो समस्याएं थीं, उनमें कुछ दूर कर ली गई हैं और जो किन्हीं कारणों से रह गई हैं, उन्हें भी दूर कराया जाएगा। इसको लेकर योजना के प्रभारी से रिपोर्ट भी ली जाएगी।I
I- गौरव कुमार, नगर आयुक्तI
अहाना ग्रींस सिटी में बदहाली।
अहाना ग्रींस सिटी में बदहाली।
अहाना ग्रींस सिटी में बदहाली।