नगर निगम की तरफ से मौके की जांच कराए जाने के बाद बीती 24 अगस्त को नोटिस जारी कर दी गई। जांच के दौरान बंगला बंद मिला। जानकारी करने पर पता चला कि यहां कोई नहीं रहता है। बंगला निखहत अफलाक के नाम पर आवंटित किया गया था। वह रामपुर के सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं और रिटायर होने के बाद वहीं पर बस गईं।
नोटिस पर दिए गए जवाब पर प्रशासन संतुष्ट नहीं हुआ और कहा गया कि निखत अफलाक को जब बंगला आवंटित किया गया था तो वह सिकी सरकारी सेवा में नहीं थीं और न ही लखनऊ में कार्यरत थीं। ऐसे में जो आवंटन किया गया वो गलत था।
आवंटन निरस्त होने के बाद नगर आयुक्त के आदेश पर नगर निगम के रेंट प्रभारी की ओर से निखहत अफलाक को 15 दिन में बंगला खाली करने का नोटिस भी जारी कर दिया गया है।