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पैसे बांटने को लेकर एक बार फिर घिरे बेनी बाबू

Wed, 05 Feb 2014 08:34 AM IST
अखिलेश बाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान बेटे के चुनाव क्षेत्र में पैसे बांटने को लेकर केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा आरोपों के घेरे में आए थे।
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इस बार उन्हें अपने सियासी समीकरण साधने के लिए सरकारी धन को लुटाने के आरोप में कठघरे में खड़ा किया जा रहा है।

आरोप है कि इस्पात मंत्रालय के स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की उपभोक्ता परिषद की बैठक के नाम पर उन्होंने अपने लोगों को खुश करने के लिए करोड़ों रुपये उड़ा दिए।

इसको लेकर सपा और भाजपा ने बेनी बाबू पर करारा हमला बोला है। साथ ही जांच की मांग की है। उधर, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इस प्रकरण पर पूरी तरह चुप्पी साध ली है।
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विधानसभा चुनाव के दौरान भी बेनी वर्मा अपने पुत्र राकेश वर्मा के चुनाव क्षेत्र दरियाबाद में इन संस्थाओं के धन को ही बंटवाने के आरोप चर्चा में आए थे।

इस बार भी सेल की तरफ से लोगों को मोबाइल, कैश व अटैचियां बांटने को लेकर ही बेनी वर्मा कठघरे में खड़े हुए हैं। उन्होंने जिस तरह से यह काम किया, उससे उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

सपा के प्रदेश महासचिव ओमप्रकाश सिंह ने आरोप लगाया कि वर्मा ने लोकसभा चुनाव के लिए वोटरों को लुभाने की खातिर यह सब किया।

नहीं तो क्या वजह थी कि उपभोक्ता परिषद की बैठक के नाम पर सिर्फ उन्हीं लोगों को बुलाया गया जो बेनी के प्रभाव क्षेत्र वाले जिलों के रहने वाले हैं।

यह वोटरों को खरीदने की कोशिश है। पूर्व मंत्री और राज्य पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष रामआसरे विश्वकर्मा ने भी इसे अनैतिक करार देते हुए जांच की मांग की है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने आरोप लगाया कि अपने लोगों को उपकृत करने में लगे मंत्री महोदय ने राजनीतिक शुचिता को तार-तार कर दिया है।

पाठक ने इस्पात मंत्रालय के धन से सौगातें लुटाने को भ्रष्टाचार करार देते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

उपभोक्ताओं के नाम पर सियासी तमाशा
इस पूरे आयोजन में उपभोक्ता परिषद की मीटिंग के नाम पर बाराबंकी, फैजाबाद, बहराइच, गोंडा और अंबेडकरनगर जिलों से लोगों के साथ मीडिया कर्मियों को भी बुलाया गया।
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इन लोगों को उपभोक्ता परिषद का सदस्य बनाने के लिए फॉर्म भरवाने से लेकर कार्ड बनाने तक के काम आयोजन स्थल पर ही हुए। इससे पता चलता है कि उपभोक्ता परिषद पहले से गठित ही नहीं थी।

जब गठित नहीं थी तो प्रत्येक सदस्य को उनके किस योगदान के लिए मोबाइल फोन, ट्रॉली बैग और आने-जाने के किराए के नाम पर 9180 रुपये दिए गए।

सेल के अधिकारियों ने साधी चुप्पी
इस मामले में जब सेल के अधिकारियों से सच्चाई जानने की कोशिश की गई तो जवाब नहीं मिला।

अथॉरिटी की तरफ से जनसंपर्क का काम देखने वाले अधिकारी विनय जायसवाल ने बताया कि उनके यहां हर व्यक्ति पत्रकारों से बात करने के लिए अधिकृत नहीं है।

जायसवाल ने एक ई-मेल पता बताते हुए कहा कि इस पर अपने सवाल भेज दीजिए। आपको जवाब भेज दिया जाएगा।
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