ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देश में कॉमन सिविल कोड को सिरे से नकार दिया है। बोर्ड का कहना है कि मुसलमान इसे कुबूल नहीं करेगा। रविवार को नदवा कॉलेज लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे व अंतिम दिन महासचिव मौलाना सैयद वली रहमानी ने मीडियाकर्मियों को यह जानकारी दी।
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रहमानी ने कहा, बोर्ड की ओर से चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में पांच करोड़ से अधिक मुसलमानों ने कॉमन सिविल कोड के विरोध में हस्ताक्षर किए थे। इनमें आधी से ज्यादा महिलाएं थीं।
ये तमाम हस्ताक्षरयुक्त फार्म लॉ कमीशन के हवाले किए गए हैं। मौलाना वली रहमानी ने कहा कि शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने तीन तलाक का विरोध नहीं किया है।
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उन्होंने तीन तलाक मामले में शिया समुदाय को बेवजह दखल देने से मना किया है। साथ ही शिया संगठनों को तीन तलाक पर पाबंदी लगाने की गलत कोशिशों में साथ देने से रोका है।
बोर्ड की कार्यकारिणी सदस्य डॉ. असमा जहरा का कहना है कि मीडिया शरीयत के खिलाफ खड़ी महिलाओं को ढूंढकर पूरे मुस्लिम समुदाय की राय बना लेता है, जबकि देश में तीन तलाक के मामले न के बराबर हैं। मीडिया के जरिए ये चंद मुस्लिम महिलाएं देश में इस्लाम के खिलाफ गलत भ्रम फैलाकर झूठी पब्लिसिटी बटोर रही हैं। इनका बोर्ड सख्त विरोध करता है।
डॉ. असमा ने बताया कि शरई कानून में किसी भी तरह के बदलाव का देश भर में मुस्लिम महिलाओं ने सख्त विरोध किया है। दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, लखनऊ, बिहार और झारखंड में हुए सेमिनार में महिलाओं ने खुलकर शरई कानून का समर्थन किया है।
बोर्ड अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में उपाध्यक्ष मौलाना डॉ. कल्बे सादिक, मौलाना शाह फखरुद्दीन अशरफ, मौलाना सैयद अरशद मदनी, सचिव मौलाना जलालुद्दीन उमरी, मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, मौलाना फजुलर्रहमी मुजदिदी, एडवोकेट जफरयाब जीलानी,
कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, मौलाना अब्दुल वहाब खिलजी, मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नदवी, मौलाना सलमान हुसैनी, कमाल फारूकी, मौलाना अतीक अहमद बस्तवी, सांसद असदुद्दीन औवेसी, महिला सदस्य डॉ. असमा जहरा, डॉ. सबिहा व दिल्ली से आईं ममदुआ साहिबा ने बोर्ड के प्रस्तावों व फैसलों पर सहमति जताई।
तलाक मामले में जारी कोड ऑफ कंडक्ट
- मुस्लिम समाज को चाहिए कि एक साथ तीन तलाक देने वाले का सामाजिक बायकाट करें।
- एक तलाक दे फिर दूसरे महीने में दूसरा तलाक दे और तीसरे महीने में तीसरा तलाक दे। अगर तीसरे तलाक से पहले समझौता हो जाए तो पिछला निकाह बहाल कर ले।
- अगर पत्नी, पति के साथ नहीं रहना चाहती तो खुला के द्वारा रिश्ता समाप्त कर ले।
- अगर पति और पत्नी की राय किसी मुद्दे पर अलग-अलग हों तो पहले इसे खुद सुलझाने का प्रयास करे, बात न बने तो दूरी बनाई जा सकती है। इस पर भी बात न बने तो परिवार व बुजुर्गों को बीच में शामिल किया जाए। इसके बाद भी पति पत्नी में समझौता नहीं हो पाता और 40 दिन गुजर जाते हैं तो एक तलाक देकर समझौते की कोशिश करे और फिर अगले तीन महीने तक प्रयास करे।
मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड पर पूरी तरह अमल करके उसकी हिफाजत सुनिश्चित करें।
शरीयत में निकाह के जरिए एक बार जो रिश्ता कायम हो जाए, वो हमेशा कायम रहे। लेकिन अगर मियां-बीबी के बीच विवाद हो जाए तो बोर्ड के कोड ऑफ कंडक्ट पर अमल करे।
कोड ऑफ कंडक्ट को इमाम मस्जिदों से एलान करके लोगों तक पहुंचाएं।
मुसलमान शादी में फिजूलखर्ची से बचें। जो पैसा बचे, उसे गरीब बच्चों की शिक्षा में खर्च करें।
मुसलमान बच्चों की उच्च शिक्षा-दीक्षा सुनिश्चित करें।
मुस्लिम संगठन महिलाओं को शरई हक दिलाने में उनकी मदद करें।
मुस्लिम वीमेन विंग के साथ हेल्पलाइन नंबर 18001028426 के जरिए मुस्लिम महिलाओं को बोर्ड से जोड़ने व उनकी रहनुमाई करने का फैसला।
शरीयत के मामलों को मुसलमान दारुल कजा में हल कराएं।