जंगल विभाग में आजकल ये मेरा घर, वो तेरा घर का गाना गाया जा रहा है। वन्य जीव महकमे के एक बड़े साहब का लखनऊ में मकान है।
वह परिवार समेत यहीं रहते हैं। लेकिन कुछ महीने पहले उन्हें विभाग ने निदेशालय के कैंपस में एक बड़ा मकान अलॉट किया। अगर इसे कोठी कहा जाए तो सही होगा। कोठी में बड़े गार्डन के साथ ही कई तरह की सहूलियतें हैं।
साहब कोठी में पिछले छह महीने से काम करा रहे हैं लेकिन यहां आने के नाम पर कुछ नहीं कहते। विभाग की राजनीति के कारण कोठी को दूसरे अफसर को भी अलॉट नहीं किया जा रहा है।
बड़े अफसर चाहते हैं यह कोठी किसी को न दी जाए। लिहाजा, काम का बहाना बनाया जा रहा है।
विभाग के ही एक अफसर ने उनसे कहा कि अगर वह कोठी में नहीं आ रहे हैं तो यह उन्हें अलॉट कर दिया जाए लेकिन उन्होंने न तो हां कहा और न ही ना। सिर्फ इशारों में समझा दिया कि ये मेरा घर वो तेरा घर।