शिक्षा विभाग के मंत्री हर कार्यक्रम में आदर्श की बातें करते घूम रहे हैं। कहते हैं, उनके रहते भ्रष्टाचार नहीं चलेगा और न ही गड़बड़ी करने वाले अफसरों को जिले की कमान दी जाएगी।
अब उन्हें कौन समझाए कि वह चाहे जितना भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण बनाने की बातें करें, पर विभाग में उनकी मंशा के मुताबिक कुछ भी नहीं चल रहा है।
शिक्षकों के ट्रांसफर या समायोजन की बात हो या जिलों में अच्छे अफसरों को बीएसए बनाने की। सबकुछ उल्टा-पुलटा हो रहा है। जिलों में ऐसे अफसर तैनाती पाने में सफल हो रहे हैं जो घपलों और घोटालों के आरोपों से घिरे हुए हैं।
शिक्षकों के ट्रांसफर और समायोजन के नाम खेल चल रहा है। यहां तक महिला शिक्षिकाएं रोड के किनारे स्कूलों में तैनाती पाने में फेल साबित हो रही हैं।
पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं। मंत्रीजी के मातहत ही उनके प्रयास की हवा निकालने में जुटे हुए हैं।