बीटीसी प्रवेश की जो अंतिम मेरिट तैयार की गई है वह अन्य पिछड़ा वर्ग के
छात्रों के लिए जी का जंजाल साबित हो रही है।
इसमें अधिक मेरिट वालों को तो
सामान्य वर्ग में मानते हुए निजी कॉलेज और कम मेरिट वालों को सरकारी सीटों
पर प्रवेश के लिए पात्र माना गया है।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं
प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह कहते हैं कि
सीटों के आवंटन में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।
आरक्षित वर्ग
में अधिक मेरिट वालों को सामान्य वर्ग में कर दिया जाता है, नहीं तो नीचे
वालों को आरक्षण का फायदा ही नहीं मिल पाएगा। बेसिक
शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने की योग्यता स्नातक व
बीटीसी है।
इसके चलते बीटीसी में प्रवेश के लिए मारामारी रहती है। इस बार
बीटीसी की 39,657 सीटों पर प्रवेश देने के लिए कट ऑफ जारी किया गया था।
इसमें से 37,400 छात्र-छात्राओं ने 10 जिलों का विकल्प भरा है।
इन्हें
दाखिला देने के लिए अंतिम मेरिट जारी की गई है। आरक्षित वर्ग के शिवपाल
सिंह का कहना है कि उनका कुल गुणांक 213.63 है।
इसके बाद भी उन्होंने 10
जिलों का जो विकल्प भरा था, उसमें उन्हें 8वां विकल्प गोरखपुर जिला आवंटित
किया गया है। यही नहीं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) न देकर
निजी कॉलेज दिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा है कि जबकि 211.73 मेरिट वाले
को पहले जिले का विकल्प देने के साथ डायट की सीट आवंटित की गई है।
वह कहते
हैं कि इसी तरह अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ हुआ है। इसलिए
एससीईआरटी को इस विसंगति को दूर करना चाहिए।