कभी-कभी कोई खूबी भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाती है। भाजपाइयों का ऐसा ही हाल है।
अनेक नेताओं वाली पार्टी की खूबी इस दल के नेताओं को मुसीबत लगने लगी है। प्रसंग एक मोर्चा से जुड़ा है। मोर्चा के अध्यक्ष ने कुछ जिलाध्यक्षों से कार्यक्रम आयोजित करने को कहा।
तर्क दिया कि इससे मोर्चा काम भी करता दिखेगा और साथ ही संदेश जाएगा कि हम लोग उस वर्ग को जोड़ने के लिए जुटे हैं, जिसे आमतौर पर भाजपा का वोट नहीं माना जाता। अध्यक्ष की तमाम हिदायतों के बावजूद कार्यक्रम नहीं हो पाए।
ज्यादातर जिलों ने मजेदार वजह बताई। जिस नेता को न बुलाएं तो वह नाराज। नेताओं को बुलवाएं तो फिर खुद की फोटो या नाम छपने की गुंजाइश नहीं। वजह, प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री, प्रदेश सह प्रभारी, जिला अध्यक्ष व अन्य प्रमुख नेता।
इतने सारे नेताओं को बुलाने के लिए बड़ा मंच बनवाने की जरूरत। इतने के बाद भी अपना नाम व फोटो छपने की गुंजाइश नहीं।