एक आईएएस अफसर हैं। गीता के रहस्यों पर घंटों चर्चा कर सकते हैं। वह जिस विभाग में हैं वहां आजकल प्रशिक्षणों का दौर चलता रहता है।
साहब पहुंचते हैं, तो विषय चाहे जो हो उसमें गीता का संदेश ऐसा समझाते हैं कि श्रोता लट्टू हो जाते हैं। तमाम विभागों के कर्मचारियों से वह मुखातिब हो चुके हैं।
व्याख्यान सुनने वाले बताते हैं कि साहब के उपदेश से बड़ी ‘राहत’ मिलती है। कई सुकून में निद्रामग्न हो जाते हैं। आध्यात्मिक होने की वजह से विभागीय काम भी बहुत टाइट होकर कराते हैं, कोई मुरव्वत नहीं करते।
कई लोगों को वह गीता के ज्ञान का मुरीद बना चुके हैं। अब उनकी आध्यात्मिकता की चर्चा सचिवालय के गलियारे से प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंचने लगी है। संत-महात्मा तक उनके पास आकर सत्संग करने लगे हैं।
फैजाबाद के एक शास्त्री जी साहब के पास खासा वक्त गुजार रहे हैं। स्टाफ वाले बताते हैं कि साहब के पास दो जिम्मेदारियां हैं और बैठने के तीन स्थान।
वह चाहे जहां होते हैं, शास्त्री जी नजर आ सकते हैं। साहब को पता हो या नहीं, शास्त्री जी के इस मेल मिलाप से उनकी दुकान जरूर सज गई है।