गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटों के बाद जिस तरह से टूजी
घोटाले के मुख्य अभियुक्तों ने राहत की गुहार लगाई उसको देख यूपी के शातिर
भी ऐसा ही कदम उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
आला अफसरों का भी मानना है कि
अगर गुवाहाटी उच्च न्यायालय का आदेश प्रभावी होता है तो इसका सीधा असर
प्रदेश के कई महत्वपूर्ण मामलों की सीबीआई जांच पर पड़ सकता है।
गुवाहाटी
उच्च न्यायालय ने गुरुवार को अपने एक फैसले में सीबीआईके गठन को ही गलत
ठहराते हुए इसे असंवैधानिक करार दे दिया।
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1000 करोड़ के घोटाले में फंसे कुशवाहा
इस फैसले के बाद यह सवाल उठ रहा
है कि राज्यों में जिन महत्वपूर्ण मामलों की सीबीआई जांच कर रही है, उनका
क्या होगा। माना जा रहा है कि सनसनीखेज मामलों में सीबीआई के चंगुल में
फंसे यूपी के कई शातिर भी सका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।
वे भी राहत
पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। जानकारों का कहना है कि
सीबीआई को संवैधानिक दर्जा देने की केंद्र सरकार द्वारा कोई पहल या ठोस
कवायद नहीं की गई तो खासी अव्यवस्था हो जाएगी।
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ऐसे में तो सीबीआई की ओर से
पूर्व में की गई तफ्तीशों पर भी सवाल उठेंगे और जांच एजेंसी की ओर से
गिरफ्तार किए गए आरोपी इसका लाभ उठाने की कोशिश करेंगे।
कई दिग्गज फंसे हैं सीबीआई के चंगुल मेंइनमें
पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, विधायक आरपी जायसवाल, आईएएस प्रदीप
शुक्ला, पूर्व सीएमओ डॉ. एके शुक्ला समेत कई लोग फंसे हुए हैं।
यूपीएसआईडीसी और ट्रॉनिका सिटी घोटाले में तो तीन आईएएस व चीफ इंजीनियर
समेत कई लोग फंसे हुए हैं। ऐसे ही अनाज घोटाले में प्रदेश के विभिन्न जिलों
में तैनात रहे आईएएस, पीसीएस व अन्य सेवाओं के अधिकारियों पर सीबीआई का
शिकंजा कसा हुआ है।
यूपी में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाला,
अनाज घोटाला, यूपीएसआईडीसी का प्लॉट आवंटन घोटाले, ट्रॉनिका सिटी घोटाला,
स्मोकलेस फ्यूल घोटाला, तकनीकी व चिकित्सीय संस्थाओं को अनियमित तरीके से
मान्यता दिए जाने का मामला, सीएमओ मर्डर केस, नीरज भडाना हत्याकांड, आगरा
में शोध छात्रा हत्याकांड समेत कई फर्जी पुलिस मुठभेड़ जैसे कई महत्वपूर्ण
मामलों की सीबीआई जांच कर रही है।