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डॉक्टर ने बच्चे के आमाशय को काटकर बनाई आहारनाल

Sat, 09 Apr 2016 11:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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केजीएमयू के डॉक्टरों का कमाल - फोटो : Amar Ujala
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पैदाइशी बीमारी से पीड़ित दो साल का उमर अब सामान्य बच्चों की तरह ही खा पी सकेगा। केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रो. जेडी रावत ने उसके आमाशय से खाने की नली बनाकर उसे अधूरी आहार नाल से जोड़ दिया। इसके बाद उमर मुंह से खाना खा सकेगा।
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सर्जरी के बाद शुक्रवार को उसे पहली बार मुंह के रास्ते दूध दिया गया। इससे पहले उसे पेट से जुड़े एक पाइप से दूध दिया जाता था। पूरी तरह निश्चिंत होने के बाद अब डॉक्टर उसे शनिवार को केजीएमयू से डिस्चार्ज करेंगे।

प्रो. जेडी रावत ने बताया कि उमर को जन्म से होने वाली आहार नाल की विकृति थी। 19 फरवरी 2014 को एक स्थानीय निजी मेडिकल कॉलेज में उसका जन्म हुआ था। इसके बाद जब उमर को दूध पिलाया गया तो उसे खांसी के साथ उल्टी हो गई।
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जांच में पता चला कि उसकी आहारनाल अधूरी है। इसी के चलते दूध पेट में जाने के बजाए उल्टी के साथ बाहर आ गया और कुछ सांस नली में चला गया। इसके कारण कुछ घंटे पहले ही जन्में बच्चे की खांसते-खांसते सांसें उखड़ने लगीं। इस पर उसे वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया।

इसके बाद सर्जन ने उसकी अविकसित नली को गले में छोटा सा चीरा लगाकर बाहर निकाल दिया, जिससे दूध उसकी सांस की नली और फेफड़ों में न जाए। क्योंकि इससे उसकी जान जा सकती थी। एक-एक अतिरिक्त नली उसके पेट में डाल दी गई। जिससे उसे बाहर से ही दिन में तीन चार बार दूध दे दिया जाता था।

मात्र 10 सेंटीमीटर ही बनी थी आहारनाल

प्रोफेसर जेडी रावत - फोटो : Amar Ujala
प्रो. जेडी रावत ने बताया कि जांच की गई तो पता चला कि आहारनाल 10 सेंटीमीटर बनकर आगे से बंद है। सामान्य बच्चों में इसकी लंबाई 15 से 20 सेंटीमीटर होती है। सभी जांच के बाद 28 अक्टूबर 2015 को उमर की सर्जरी की गई।

लगभग तीन घंटे की सर्जरी में आमाशय को किनारे से काटकर एक ट्यूब बनायी गई। उसे गले तक लाया गया और बाहर निकालकर छोड़ दिया गया। क्योंकि ट्यूब में टांके लगाए गए थे। यदि तुरंत उसे मुंह से जुड़ी अविकसित खाने की नली से जोड़ दिया जाता तो लीकेज की संभावना हो सकती थी। ऐसी स्थिति में बच्चे को बचाना संभव नहीं था। 
दो माह से अधिक समय तक कृत्रिम आहार नाल के ठीक होने का इंतजार किया गया। जब भरोसा हो गया कि आमाशय को काटकर बनाई गई नली ठीक है तब छह अप्रैल को उसके गले से निकली दोनों खाने की की नलियों को अंदर कर आपस में जोड़ दिया गया।

दो दिन बाद शुक्रवार को उमर को पहली बार दूध पीने के लिए दिया गया। इससे न तो उसे खांसी आई और न ही उल्टी। लगभग एक सप्ताह तक उमर को दाल, दलिया जैसी चीजें खिलाने की सलाह दी गई है, जिससे सर्जरी के जोड़ पर दबाव न पड़े।
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एक नजर इस बीमारी पर

अब नहीं लगेगा खाने का स्वाद अजीब - फोटो : Demo
- इसोफेजियल एट्रिजिया है बीमारी का नाम - 5000 में एक बच्चे को हो सकती है ये विकृति - जन्म से अविकसित होती है आहारनाल - 2006 में केजीएमयू में सृष्टि वर्मा नाम की बच्ची की हुई थी पहली सर्जरी।
स्वाद का अनुभव
उमर को जन्म के तुरंत बाद से ही मुंह के रास्ते दूध पिलाना बंदकर दिया गया था। इससे उसे किसी भी तरह के स्वाद का अनुभव नहीं हो रहा था। लेकिन उम्र के बढ़ने के साथ ही उसे मीठा-नमकीन स्वाद का अनुभव कराने के लिए कुछ खाने के लिए दिया जाता था।

ये खाना उसके गले से निकले पाइप से बाहर निकल जाता था लेकिन इससे उसे स्वाद का अनुभव हो गया था। इसका फायदा ये हुआ कि उसे अब खाने का स्वाद अजीब नहीं लगेगा।

इस टीम ने की सर्जरी
प्रो.जेडी रावत, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधीर सिंह, रेजीडेंट डॉ. ओम, डॉ. अभिषेक, एनेस्थेटिस्ट डॉ. अमित मलिक, डॉ. विनीता सिंह, सिस्टर वंदना।
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