लखनऊ (समीउद्दीन नीलू)। चमचमाती सड़कों और सुविधाओं से सजी राजधानी की पॉश कॉलोनी अलीगंज के घरों के भीतर एक कड़वी सच्चाई छिपी है। जिले में कुपोषण के शिकार सबसे अधिक बच्चे यहीं रहते हैं। बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ताजा रिपोर्ट बताती है कि अलीगंज में 1250 बच्चे कुपोषित हैं। इनमें से 181 बच्चे अति कुपोषित (सैम) और 1069 बच्चे कुपोषित (मैम) श्रेणी के हैं। वहीं, पूरे जिले में 981 बच्चे अति कुपोषित और 7421 बच्चे कुपोषित श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। काकोरी में सबसे कम 566 बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में हैं।
क्षेत्र कुपोषित अति कुपोषित
अलीगंज (शहर) 1069 181
आलम नगर (शहर) 847 97
बीकेटी 869 110
चिनहट 701 52
गोसाईगंज 718 52
काकोरी 483 83
मलिहाबाद 484 65
माल 589 64
मोहनलालगंज 851 83
सरोजनीनगर 810 114
कुल 7421 921
ऐसे चिह्नित किए जाते हैं कुपोषित व अति कुपोषित बच्चे
सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर प्रतिमाह बच्चों का वजन और लंबाई आदि का ब्योरा पोषण ट्रैकर पर अपलोड करती हैं। उसी के आधार पर सीवियर एक्यूट मैलन्यूट्रिशन (सैम) और मॉडरेट एक्यूट मैलन्यूट्रिशन (मैम) ट्रैकर खुद छांट लेता है।
000
बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए प्रतिमाह पोषाहार वितरित किया जाता है। प्रत्येक शनिवार सैम व मैम बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण निकटवर्ती सीएचसी, पीएचसी पर कराने के साथ उन्हें मल्टी विटामिन एवं कुपोषण से बचाने के लिए छह प्रकार की दवाएं दी जाती हैं। अति कुपोषित बच्चों को बलरामपुर और राममनोहर लोहिया अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में 15 दिन के लिए भर्ती कराने के साथ उनके अभिभावकों को जागरूक किया जाता है।
-
श्रेयश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी