भाई-बहन के स्नेह व प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन पर मिलावटी खाद्य सामग्री की रोकथाम के लिए कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है। इसी के चलते बेखौफ धंधेबाज रक्षाबंधन पर मिलावटी खोवा व खाद्य तेलों से तैयार मिठाई खपाने की तैयारी में हैं। दूध मंडियों में भी दो गुना खपत देखते हुए सिंथेटिक पनीर के साथ सिंथेटिक व मिलावटी दूध बेच कर जेब भरी जा रही है।
रक्षाबंधन पर एक बार फिर सबसे ज्यादा गरम मिलावटी खाद्य तेल का बाजार है। सरसों तेल, वनस्पति घी व रिफाइंड की बढ़ती मांग को देखते हुए मुनाफाखोर महज 12 हजार लीटर तैयार घटिया व मिलावटी खाद्य तेल बाजार में खपाने की तैयारी में हैं।
इसके लिए 55 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिलने वाले विदेशी सीपीओ पॉम ऑयल में इंडस्ट्रीयल कलर (बटर येलो) की मिलावट कर पीले चमकदार रंग का मिलावटी सरसों तेल तैयार किया जा रहा है। इसे ही टिनों में भर ब्रांडेड कंपनियों के रैपर चस्पा कर बाजार में खपाया जाएगा।
15 किलो के एक टिन पर तीन से चार सौ रुपये की बचत से मुनाफाखोरों को यह धंधा खूब भा रहा है।नकली मावा और पनीर सबसे ज्यादा खतरनाकचिकित्सकों का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल होने वाले हानिकारक तत्व पेट संबंधी कई बीमारियों का मुख्य कारण बनते हैं।
विशेष तौर पर नकली मावा व पनीर सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। हृदय तक रक्त ले जानी वाली धमनियों में जम जाना है जिससे हार्ट अटैक तक हो सकता है। इस मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन बैक्ट्रीरियल इंफेक्शन के साथ पेट दर्द व गैस्ट्रो डायरिया व बदहजमी की पीड़ा को भी कई गुना तक बढ़ा देगा।