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सपा के 'सुप्रीमो' बने अखिलेश प्रत्याशियों पर जल्द ही लेंगे बड़े फैसले

Wed, 18 Jan 2017 04:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
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समाजवादी पार्टी में एक पखवाड़े से चली आ रही उहापोह अखिलेश यादव को ‘साइकिल’ सिम्बल मिलने के साथ ही खत्म हो गई। अखिलेश अब पूरे आत्मविश्वास से आगे बढ़ेंगे। उनकी चुनावी रणनीति पर अब युद्ध स्तर पर अमल होगा। चुनावी लिहाज से वे जल्द ही कई बड़े फैसले लेंगे।
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नए साल की पहली तारीख को सपा के विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश यादव को अध्यक्ष चुने जाने के दिन ही सपा के सिम्बल का विवाद चुनाव आयोग पहुंच गया था। मुलायम सिंह यादव खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हुए साइकिल चुनाव चिह्न पर दावा जता रहे थे।

इसके जवाब में अखिलेश की ओर से आयोग को विधायकों, सांसदों और अधिवेशन के डेलीगेट्स के शपथ पत्र दिए गए। चुनाव आयोग ने सोमवार शाम अखिलेश को साइकिल सिम्बल दे दिया। पार्टी की स्थापना के 25वें साल में अखिलेश यादव सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। अब वे पूरे उत्साह से साइकिल चलाएंगे।
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पिछले 15 दिनों से सिम्बल के इंतजार में सपा की चुनावी तैयारियां पिछड़ती दिखाई पड़ रही थीं। हालांकि रणनीति के लिहाज से दिन-रात काम चल रहा था, लेकिन अंदेशा था कि कहीं सिम्बल जब्त हुआ तो क्या होगा?

मजबूत हुई अखिलेश की पकड़ और बढ़ा कद

- फोटो : amar ujala
आयोग के फैसले के साथ ही अब ‘साइकिल’ पर बना सस्पेंस खत्म हो गया। इससे अखिलेश ही नहीं, उनकी पूरी टीम का मनोबल बढ़ा है। वे जोश से लबरेज हैं।

पार्टी अध्यक्ष के रूप में अखिलेश अब विजयी भाव और बढ़े हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। पार्टी में उनकी स्वीकार्यता पर चुनाव आयोग की मुहर से उनका राजनीतिक कद और पकड़ भी मजबूत हुई है।

साइकिल के लिए की थी जबरदस्त ब्रांडिंग
अखिलेश ने सपा सरकार में ‘साइकिल’ की जबरदस्त ब्रांडिंग की थी। सीएम बनने के बाद भी उन्होंने कई बार साइकिल चलाई। राजधानी लखनऊ समेत सभी प्रमुख शहरों में साइकिल ट्रैक बनवाया। इटावा से लॉयन सफारी तक साइकिल हाई-वे का निर्माण कराया। साइक्लिंग के इंटरनेशनल इवेंट करवाए।

आठ लाख से ज्यादा मजदूरों को साइकिलें बंटवाईं। ब्रांडिंग पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद साइकिल छिन जाने का डर टीम अखिलेश को सता रहा था। अब चुनाव आयोग से साइकिल मिल जाने से उनके समर्थकों में खुशी का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

मुलायम, शिवपाल के लिए बड़ा झटका

शिवपाल और मुलायम
साइकिल चुनाव चिह्न छिन जाना और पार्टी अध्यक्ष पद चले जाना मुलायम सिंह ही नहीं, उनके साथ खड़े शिवपाल सिंह यादव के लिए भी तगड़ा झटका है।

कानूनी तौर पर मुलायम अब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और शिवपाल प्रदेश अध्यक्ष नहीं रहे। उनके नजदीकी लोगों में इस फैसले से मायूसी है। वे यह मानकर चल रहे थे कि साइकिल सिम्बल उन्हें मिलेगा या आयोग इसे फ्रीज कर देगा। उन्हें अखिलेश यादव को साइकिल मिलने का अनुमान नहीं था।

जिस सपा की स्थापना की, सींचा, उसी से बेदखल
अब उन्हें यह स्वीकार करना होगा कि जिन मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी की स्थापना करके दो बार अपनी सरकार बनाई, 2012 में अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाया, वह अब सपा के मुखिया के नहीं हैं। चुनाव आयोग के फैसले से मुलायम खेमे की रणनीति गड़बड़ा गई है। मुलायम गुट जल्द ही पहले-दूसरे चरण के लिए अपने प्रत्याशियों की सूची जारी करेगा।
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चुनाव में आमने-सामने होंगे बाप-बेटे

विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए सोमवार को नामांकन शुरू हो रहे हैं। अब चुनावी मैदान में मुलायम व अखिलेश आमने-सामने होंगे।

मुलायम ने आयोग का फैसला आने से पहले दोपहर में ही सपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठक में इसका संकेत दे दिया था। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का जो भी फैसला होगा, मंजूर होगा।
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