सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा से सवाल किया है कि रोजगार देने के उसके दावों का क्या रहा ? नौजवान कब तक रोजगार के झांसे में रहेंगे। उन्होंने कहा कि झांसा दर झांसा भाजपा का एजेंडा है। पहले बैंकिंग सेक्टर को संकट में फंसा दिया, अब उसे उबारने की घोषणा निरर्थक कसरत नहीं तो क्या है ? दूध उत्पादन बढ़ाने और गौमाता को संरक्षण देने की स्थिति यह है कि सरकारी संरक्षण में रोज गायों की मौत हो रही है। आवारा पशु खेत चर रहे हैं।
अखिलेश ने सोमवार को बयान में कहा कि सरकार जीवन बीमा निगम, एयर इंडिया और रेलवे से हाथ खींच रही है। भाजपा सरकार की नीतियों के कारण अन्नदाता को ऊर्जा विहीन बनाया जा रहा है। मंहगाई पर कोई नियंत्रण नहीं है। उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं। बाहरी निवेश आ नहीं रहा है। नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर सृजित नहीं हो रहे हैं।
भाजपा सरकार राज में कौन सी अर्थव्यवस्था है, जिससे आम नागरिक का कोई भला हुआ ? किसान, गरीब, गांव-खेती, छोटा कारोबारी, छात्र-छात्राएं सभी तो भाजपा के धोखे के शिकार हैं। आयुष्मान योजना का क्या हुआ? अस्पतालों में दवाएं नहीं हैं, जिन दवाओं के दाम घटाने के वादे किए गए थे, वे पूरे नहीं हुए। योजनाओं के विचित्र नाम रखकर जनता को भ्रमित करने का काम ही भाजपा सरकार कर रही है। तभी किसान उड़ान, विजन, डिजिटल क्रांति जैसी शब्दावली चल रही हैं।
22 हजार साल में सीईओ की बराबरी नहीं कर पाएंगे घरेलू कामगार
सपा अध्यक्ष ने कहा, भारत में एक प्रतिशत अमीरों के पास 70 प्रतिशत आबादी की 4 गुना दौलत बंधक है। देश के 63 अरबपतियों की संपत्ति तो भारत के एक साल के बजट से भी अधिक है। देश में एक टॉप सीईओ साल में जितना कमाता है, उतना हासिल करने में किसी घर की मेड (घरेलू कामगार) को 22,277 साल लग सकते हैं। जाहिर है, भाजपा राज में अमीर और अमीर हो रहे हैं। गरीबी हटाओं का अर्थ गरीब को हटाओं हो गया है।