प्रदेश के भूतत्व एवं खनिकर्म राज्य मंत्री स्वतंत्रत प्रभार गायत्री प्रसाद प्रजापति जाटों को नौकरियों में आरक्षण देने का लाभ दिए जाने का विरोध करने पर बुरे फंस गए।
उन्हें यह नहीं मालूम था कि यूपी में वर्ष 2000 से ही जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण का लाभ मिल रहा है।
मंत्री के इस विरोध पर जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि प्रदेश में उनकी सरकार है, क्या वह इसे समाप्त कराने के लिए मुख्यमंत्री से बात करेंगे तो वह दाएं-बाएं करने लगे।
बाद में किसी तरह उनके साथियों ने मामला संभाला और सामाजिक न्याय रथ यात्रा के दूसरे चरण पर बात लाकर समाप्त की।
गायत्री प्रसाद प्रजापति ने बुधवार को सपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता बुलाई थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जाटों को आरक्षण का लाभ देकर मुजफ्फरनगर दंगे को भुनाना चाहती है।
जाट संपन्न हैं और इसलिए उन्हें ओबीसी का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इससे पिछड़ों का हक मरेगा। प्रदेश सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग को आगे बढ़ाना चाहती है।
यूपी की 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ देने के लिए कैबिनेट और विधान मंडल के दोनों सदनों से प्रस्ताव पास कराकर केंद्र को भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों जाटों को आरक्षण देने के मसले पर एक हैं। उनसे जब यह पूछा गया कि यूपी में वर्ष 2000 से ही जाटों को पिछड़ों का लाभ दिया जा रहा है।
प्रदेश में मौजूदा समय उनकी सरकार है तो क्या वह अपनी सरकार से जाटों का आरक्षण समाप्त कराएंगे? इस पर वह इधर-उधर देखने लगे।
जब उनसे पूछा गया कि वह जानते हैं कि यूपी में पहले से ही जाटों को आरक्षण दिया जा रहा है? तो उन्होंने बड़ी ही मासूमियत से सिर हिलाते हुए कहा कि नहीं उन्हें स्वयं ही इसकी जानकारी नहीं है।
उनके साथ आए लोगों ने किसी तरह से मामला शांत कराया और सामाजिक और अधिकार रथ यात्र के दूसरा चरण शुरू किए जाने पर लाकर बात समाप्त की।
ओबीसी आरक्षण की सूची में 78वें नवंबर हैं जाट
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2000 में जाटों को ओबीसी का लाभ देने की अधिसूचना जारी की गई। उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और रामप्रकाश गुप्ता मुख्यमंत्री थे। पिछड़ा वर्ग की सूची में किसी भी जाति को शामिल करने से पहले इसका सर्वे कराया जाता है और पिछड़ा वर्ग से संस्तुति ली जाती है।
हालांकि, तत्कालीन भाजपा सरकार ने ऐसा नहीं किया और जाटों को ओबीसी का लाभ देने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई। जाट ओबीसी की आरक्षण सूची में 78वें नंबर पर हैं।