मान्यवर कांशीराम महाविद्यालय में आयोजित जनसभा में पूरी तरह से बसपा की छाप दिखी। मंच के पीछे लगे बैनर पर एक तरफ कांशीराम की बड़ी तस्वीर थी तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य की। ऊपरी हिस्से में डॉ. अंबेडकर और लोहिया की तस्वीर लगाई गई। इतना ही नहीं, मंच पर प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल और जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव को छोड़कर ज्यादातर बसपा पृष्ठभूमि से निकलने वाले नेताओं को ही जगह दी गई। पांडाल में सपा के झंडे बैनर के साथ ही पंचशील का झंडा लहराता रहा।
मंच से लगातार मान्यवर कांशीराम और मुलायम सिंह अमर रहे के नारे लगते रहे। कांशीराम से जुड़े संस्मरण सुनाए गए तो गीतों में बाबा साहब और कांशीराम का गुणगान भी किया गया। स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को संविधान की प्रति और कांशीराम के भाषण का संग्रह भेंट करते हुए कहा कि अब कांशीराम के मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही पूरा हो सकता है।
सपा अध्यक्ष ने भी उनके सुर में सुर मिलाया और लोगों को भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि 1993 से पहले के हालात पैदा हो गए हैं। उस वक्त कांशीराम और मुलायम सिंह ने भाजपा को रोका था।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज ने बसपा से साइकिल पर सवार होने वाले नेताओं का नाम गिनाते हुए कहा कि अब वहां से सभी नेता सपा में आ गए हैं। इसलिए कांशीराम के मिशन को सपा ही पूरा करेगी। उन्होंने लोहिया द्वारा अंबेडकर को लिखे गए पत्रों का जिक्र करते हुए दलितों को साथ आने का आह्वान किया। कांशीराम की मूर्ति अनावरण समारोह के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य के पिता बदलू राम मौर्य की मूर्ति का भी अनावरण किया गया।