मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की कि अगले वर्ष से उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के समस्त पुरस्कारों की राशि दोगुनी कर दी जाएगी।
इसके साथ ही पुरस्कृत होने वाले विद्वानों को पुरस्कार वितरण समारोह में
आने-जाने का खर्च भी मिलेगा। संस्कृत को सम्मान व रोजगार से जोड़ने के लिए
सरकार इसे कंप्यूटर से जोड़ने का काम करेगी।
मुख्यमंत्री शनिवार को यहां 5, कालिदास मार्ग स्थित अपने आवास पर संस्कृत संस्थान के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने पिछले पांच वर्षों से संस्कृत संस्थान के पुरस्कार न बंटने के लिए
पिछली बसपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अब ये पुरस्कार तय समय
पर ही बंटेंगे।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2008 के संस्थान के सर्वोच्च विश्व भारती सम्मान के
तहत बंगलूरूसे प्रो. एनएस रामानुज ताताचार्य को पुरस्कार स्वरूप अंगवस्त्र,
ताम्रपत्र व 2.51 लाख रुपये का चेक प्रदान किया।
एक लाख रुपये का महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार वाराणसी के पंडित शिवजी उपाध्याय
को दिया गया। मुख्यमंत्री ने 19 संस्कृत 19 विद्वानों को विभिन्न पुरस्कार
प्रदान किए। पुरस्कृत होने वाले चार विद्वान समारोह में नहीं पहुंच सके।
मुख्यमंत्री ने संस्कृत को देवभाषा व वेदभाषा बताते हुए कहा कि अंग्रेजी व
कुछ अन्य भाषाओं को सम्मान व प्रतिष्ठा से जोड़ा गया, लेकिन दुनिया की सबसे
प्राचीन भाषा पीछे छूट गई। सरकार संस्कृत को प्रतिष्ठा व सम्मान से जोड़ने
के लिए हरसंभव कदम उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बसपा सरकार ने न सिर्फ संस्कृत बल्कि हिंदी के
पुरस्कारों को भी बंद कर दिया था। पांच साल से ये पुरस्कार नहीं बंटे।
उन्होंने कहा कि उस सरकार को इसकी सजा भी मिल गई। मुख्यमंत्री ने संस्कृत
संस्थान के अध्यक्ष शंकर सुहेल की मांग पर संस्थान में हॉल बनवाने व
कंप्यूटर व संस्कृत का प्रोजेक्ट बनाकर इस भाषा को आगे बढ़ाने का आश्वासन
दिया।
इस मौके पर कारागार मंत्री राजेंद्र चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन,
प्रमुख सचिव भाषा ललित वर्मा सहित विभिन्न विभागों के मंत्री व अधिकारी
उपस्थित रहे। संचालन विजय कर्ण ने किया।
तीन बार कार्यक्रम टालने पर सीएम ने दी सफाई
समारोह में महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार से सम्मानित शिवजी उपाध्याय ने इसके
पहले तीन बार समय तय कर पुरस्कार वितरण कार्यक्रम टालने पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि विद्वानों को बार-बार अपने रिजर्वेशन निरस्त कराने पड़े।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि जरूरी
कार्यक्रम व राजनीति की वजह से ये कार्यक्रम टालने पड़े। अब आगे से ऐसा कभी
नहीं होगा।