सपा के सम्मेलनों में हंगामे, मारपीट और फायरिंग की गाज कुछ जिला इकाइयों और पार्टी नेताओं पर गिर सकती है। सपा इन हंगामों की जांच करा रही है।
लोकसभा चुनाव में पार्टी विरोधी काम करने वाले नेताओं की पहचान भी की जा रही है। उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो सकती है।
सपा ने दो जून को प्रदेश के सभी जिलों में सम्मेलन किए थे। करीब एक दर्जन जिलों में सम्मेलन हंगामों की भेंट चढ़ गए।
महराजगंज, बलरामपुर, संभल समेत कई जगह तो मारपीट भी हुई। महराजगंज में हवाई फायरिंग तक हुई। एक-दूसरे गुट के खिलाफ नारेबाजी और कुर्सी चलाने की घटनाएं तो कई जिलों में हुईं।
कई नेताओं ने की अनुशासनहीनता
सपा के कई जिम्मेदार नेताओं ने अनुशासनहीनता का आचरण किया। संभल में तो लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे शफीकुर्रहमान बर्क ने कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद के खिलाफ कार्रवाई का ही प्रस्ताव पेश कर दिया।
यह अलग बात है कि संभल विधानसभा क्षेत्र में उन्हें भाजपा प्रत्याशी से करीब 40 हजार वोटों की बढ़त मिली थी।
प्रत्याशियों की समीक्षा बैठक के बाद भी बर्क मीडिया के सामने मंत्री पर आरोप लगाने में पीछे नहीं रहे थे।
सपा नेतृत्व ने जिस मकसद के लिए सम्मेलन आयोजित करने के निर्देश दिए थे, हंगामों के कारण वो पीछे छूट गया। प्रदेश में गलत संदेश गया सो अलग।
फजीहत कराने वाले नेताओं से नाखुश
बताया जाता है कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सार्वजनिक कार्यक्रमों में पार्टी की फजीहत कराने वाले नेताओं से नाखुश हैं।
वे हंगामों की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करने के पक्षधर हैं। उन्होंने कई जिलों के जिम्मेदार नेताओं से घटनाक्रम की जानकारी भी ली है।
संभव है जांच के बाद कुछ जिला इकाइयां भंग कर दी जाएं।
कई स्तरों पर समीक्षा और फीडबैक के दौरान भी कई जिलों के नेताओं और संगठन को लेकर गंभीर शिकायतें मिली हैं। इनके आधार पर भी कार्रवाई हो सकती है।