यूपी में बिजली की किल्लत को देखते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जल्द ही प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर राज्य के लिए बिजली समस्या का हल निकालना चाहते हैं।
केंद्र से कोटे की पूरी बिजली न मिल पाने की वजह से प्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है। केंद्रीय बिजलीघरों से यूपी का कोटा 6000 मेगावाट है जबकि बमुश्किल 4500 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है।
यही नहीं अनपरा बिजलीघर में कोयले की पर्याप्त आपूर्ति न होने से भी उत्पादन पर असर पड़ रहा है। जबर्दस्त किल्लत को देखते हुए प्रदेश की ओर से केंद्र से गैर आवंटित कोटे की बिजली पर दावा किया जा रहा है।
रोज खरीदी जा रही 10 करोड़ की बिजली
प्रदेश के बिजलीघरों के उत्पादन में सुधार के बावजूद सूबे में बिजली का संकट बना हुआ है।
हालांकि भीषण गर्मी को देखते हुए पावर कॉर्पोरेशन रोजाना 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिजली खरीदकर आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर रखने का प्रयास कर रहा है लेकिन केंद्रीय कोटे की बिजली में कमी ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
प्रदेश में बिजली की मांग 12,000 से 12,500 मेगावाट बनी हुई है जबकि अधिकतम उपलब्धता 11,500 मेगावाट तक ही हो पा रही है।
अभियंताओं का कहना है कि अगर केंद्रीय कोटे की पूरी बिजली मिल जाए तो शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति में कोई समस्या नहीं है।
मांग और पूर्ति में भारी अंतर
मांग और उपलब्धता में लगभग 1000-1500 मेगावाट का अंतर है और इतनी ही बिजली केंद्र से नहीं मिल पा रही है।
अभियंताओं के अनुसार केंद्रीय सेक्टर के तापीय से लेकर परमाणु बिजलीघर तक के उत्पादन में तकनीकी कारणों से कमी हुई है जिससे सबसे ज्यादा हिस्सा यूपी का ही कम हुआ है।
वैसे मौसम में बदलाव होने की वजह से मांग थोड़ी कम हुई लेकिन बिजली की कमी बनी हुई है और शिड्यूल के मुताबिक आपूर्ति में दिक्कत आ रही है।
इन मुद्दों पर पीएम से बात करेंगे
प्रदेश में बिजली की किल्लत को देखते हुए ऊर्जा विभाग ने केंद्र से जुड़े बिंदुओं को लेकर एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कराया है। इसे मुख्यमंत्री के पास भेजा गया है।
मुख्यमंत्री जल्द ही प्रधानमंत्री से मिलकर इन बिंदुओं पर चर्चा करेंगे और प्रदेश को बिजली संकट से उबारने में सहयोग का अनुरोध करेंगे।
पीएम से जिन विषयों पर वार्ता होनी है उसमें निर्धारित कोटे की पूरी बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली को दी जा रही गैर आवंटित कोटे की बिजली रोककर यूपी को देने तथा बिजलीघरों में कोयले की आपूर्ति सामान्य कराने की मांग शामिल है।