अखिलेश और मोदी के बीच विकास की दौड़ जारी है। इस बीच, मोदी के एक प्लान को यूपी में सीएम अखिलेश यादव ने हूबहू लागू भी कर दिया है।
सीएम ने राज्य सरकार की सभी योजनाओं में शपथ पत्र यानी एफिडेविट जमा करने की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से खत्म करने के निर्देश दिए हैं।
तमाम योजनाओं का लाभ लेने के लिए और कॉलेज व यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए भी अब युवाओं को कोई एफिडेविट नहीं देना पड़ेगा। यह जानकारी उत्तर प्रदेश सूचना विभाग की ओर से सोमवार को जारी किए गए एक प्रेस नोट में दी गई है।
अखिलेश को सताई लोगों की फिक्र
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की समस्त योजनाओं के संबंध में लागू शपथ पत्र की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया है।
सीएम ने सरकारी प्रक्रियाओं के सरलीकरण और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जिन योजनओं एवं सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने और शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश पाने के लिए लाभार्थी द्वारा शपथ पत्र देने की व्यवस्था लागू थी, मुख्यमंत्री ने उसे तत्काल प्रभाव से खत्म करने के निर्देश दिए हैं।
शपथ पत्र की जगह अब आवेदक को सेल्फ अटेस्टेड प्रमाण पत्र पेश करना होगा। मुख्यमंत्री ने माना कि इस फैसले से लोगों के धन और समय दोनों की बचत होगी।
यही तो था मोदी का प्लान
गौरतलब है कि पिछले दिनों विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कागजात अटेस्ट कराने की प्रक्रिया को खत्म करने के लिए कहा था।
उन्होंने कहा था कि यह व्यवस्था सामंतवादी लगती है और लोगों को खुद अपने कागजात सत्यापित करके जमा करने का अधिकार मिलना चाहिए।
केंद्र सरकार जल्द ही इस नियम को पूरे देश में लागू करेगी और प्रमाण-पत्रों व अन्य कागजातों को गजटेड अधिकारियों से अटेस्ट कराने के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सचिवों को कहा था कि इस व्यवस्था को खत्म कर सेल्फ अटेस्ट को बढ़ावा दिया जाए।
नियम की वजह से होता था फर्जीवाड़ा
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि ऐसे नियमों से लोगों को कचहरी से लेकर गजटेड अफसरों के कितने चक्कर लगाने पड़ते हैं।
खुलेआम बाजारों में ऐसी मोहरें भी बिकती हैं, जिन्हें युवा अपने दस्तावेजों पर लगाकर जमा कर देते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इसकी जांच भी नहीं होती।
ऐसे में मोदी ने कहा था कि जनता को इस सामंती नियम से बचाया जाना चाहिए, ताकि सरकार के कामकाज में भेदभाव न हो सके।
ये नियम भी गुजरात मॉडल का
जानकारी के मुताबिक, गजटेड अधिकारी से कागजातों को सत्यापित कराने का नियम उन 10 नियमों में शामिल हैं, जिन्हें सामंती नियमों की श्रेणी में रखा गया है।
गौरतलब है कि यह निर्देश गुजरात मॉडल का ही हिस्सा है। इस नियम को खत्म करने से सबसे ज्यादा फायदा छात्रों को होगा।
प्रधानमंत्री ने कथित तौर पर सचिवों व विभाग प्रमुखों से कहा था कि लोग अपने असली कागजात लाते हैं तो सेल्फ-अटेस्टेड कागजात को पर्याप्त माना जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा था कि इससे लोगों का समय और पैसा बचेगा। उन्हें अतिरिक्त मेहनत और शोषण भी नहीं करना होगा।