मरीजों को मेडिकल रिकॉर्ड मुहैया कराने के मामले में प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को महज खानापूर्ति में ही निपटा दिया।
अदालत ने फैसला दिया था कि इलाज के बाद मरीजों को पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए। पर सरकार ने ऐसा आदेश जारी किया जिसके दायरे में केवल निजी अस्पताल ही आते थे, सरकारी नहीं।
अब हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्ती दिखाते हुए नया आदेश जारी करने को कहा है जिसके दायरे में सरकारी और निजी सभी अस्पताल आएं।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और अरविंद कुमार त्रिपाठी द्वितीय की खंडपीठ ने कहा कि एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेदिक व यूनानी विधाओं वाले सभी निजी व सरकारी चिकित्सा संस्थानों (अस्पतालों व क्लीनिकों) को शामिल करते हुए रिवाइज्ड ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया जाए।
इस मेमोरेंडम को सभी संस्थानों को भेजकर अदालत को इसकी जानकारी दी जाए। खंडपीठ ने यह आदेश विमला देवी की याचिका पर 12 सितंबर को सुनाए गए फैसले के सिलसिले में दिया है।